आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने दुनियाभर के कई बड़े बिजनेस मॉडल को चुनौती दी है, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिकी एडटेक कंपनी Chegg बन गई है। एक समय पर ऑनलाइन शिक्षा की दुनिया में दबदबा रखने वाली इस कंपनी की वैल्यू 2021 के दौरान करीब 14–15 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी, जब कोविड-19 के कारण ऑनलाइन पढ़ाई का चलन तेजी से बढ़ा था। लेकिन जैसे ही ChatGPT जैसे एडवांस AI टूल्स बाजार में आए, Chegg का बिजनेस मॉडल धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ ही वर्षों में कंपनी की वैल्यू लगभग 99% तक गिर गई और यह कुछ करोड़ डॉलर तक सिमट गई, जो यह दिखाता है कि टेक्नोलॉजी में बदलाव कितनी तेजी से बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ सकता है। Chegg का मुख्य बिजनेस मॉडल छात्रों को सब्सक्रिप्शन के जरिए होमवर्क हेल्प, टेक्स्टबुक सॉल्यूशन और ऑनलाइन ट्यूटरिंग सेवाएं देना था। लेकिन ChatGPT जैसे AI टूल्स ने वही सेवाएं मुफ्त या बहुत कम लागत में तुरंत उपलब्ध करानी शुरू कर दीं, जिससे छात्रों का झुकाव तेजी से AI की ओर बढ़ गया। इसका सीधा असर Chegg के सब्सक्राइबर बेस और रेवेन्यू पर पड़ा कंपनी के यूजर्स कम होते गए और आय में भारी गिरावट दर्ज की गई। यहां तक कि कंपनी को कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी और अपने ऑपरेशन को छोटा करना पड़ा। रिपोर्ट्स बताती हैं कि AI टूल्स के कारण वेब ट्रैफिक और डिमांड में लगातार गिरावट आई, जिससे कंपनी को बड़े स्तर पर लागत कटौती के फैसले लेने पड़े। यह पूरा घटनाक्रम इस बात का बड़ा उदाहरण बन गया है कि AI सिर्फ नई तकनीक नहीं बल्कि “डिसरप्शन” का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है, जो पारंपरिक डिजिटल बिजनेस मॉडल को तेजी से बदल रहा है। Chegg ने खुद AI अपनाने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म बाजार में मजबूत पकड़ बना चुके थे और प्रतिस्पर्धा बहुत कठिन हो चुकी थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में ऐसे और भी कई सेक्टर खासतौर पर एजुकेशन, कंटेंट और कस्टमर सपोर्ट AI के कारण बड़े बदलाव से गुजरेंगे। Chegg का मामला यह साफ संकेत देता है कि अगर कंपनियां नई तकनीक के साथ समय पर खुद को अपडेट नहीं करतीं, तो चाहे वे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, उनका पतन बहुत तेजी से हो सकता है।
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