दुनिया में ऊर्जा और खाद्य तेल को लेकर एक नया बड़ा संकट उभरता दिख रहा है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है। इंडोनेशिया और मलेशिया ने अपने बायोडीजल कार्यक्रमों को तेजी से बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे अब पाम ऑयल का बड़ा हिस्सा रसोई की बजाय वाहनों के ईंधन में इस्तेमाल होगा। इंडोनेशिया ने B-50 मैंडेट लागू करने का ऐलान किया है, यानी डीजल में 50% तक पाम ऑयल आधारित बायोडीजल मिलाया जाएगा, जबकि मलेशिया भी B-10 से बढ़ाकर B-15 की ओर बढ़ रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक खाद्य तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। पाम ऑयल दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला खाद्य तेल है और भारत अपनी जरूरत का करीब 60% तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा पाम ऑयल का होता है। जैसे ही इसका उपयोग बायोडीजल में बढ़ेगा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी उपलब्धता घटेगी और कीमतों में तेज उछाल आने की आशंका है। इससे भारत में खाने के तेल की कीमतों पर सीधा दबाव बन सकता है और महंगाई बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल तेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक तनाव पहले से ही स्थिति को जटिल बना रहे हैं। भारत में खाद्य तेल की आत्मनिर्भरता कम होने के कारण यह दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में घरेलू तिलहन उत्पादन जैसे सरसों, सोयाबीन और मूंगफली को बढ़ावा देना ही लंबे समय का समाधान माना जा रहा है, वरना अंतरराष्ट्रीय ‘ऑयल गेम’ का सीधा असर भारतीय रसोई की महंगाई पर लगातार दिखता रहेगा।
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