वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम कड़ी माने जाने वाला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस समय लगभग बंद स्थिति में है, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के कारण इस समुद्री मार्ग पर सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें हजारों नाविक सीमित संसाधनों के साथ फंसे हुए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने होर्मुज से आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू कर दी है। इस कारण न तो ईरान का तेल बाहर जा पा रहा है और न ही अन्य देशों का माल इस रूट से गुजर पा रहा है। परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और ब्रेंट क्रूड 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जबकि WTI क्रूड भी 97 डॉलर के करीब बना हुआ है। यह लगातार कई दिनों से बढ़ती कीमतों का संकेत है कि बाजार में तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। इस संकट का असर केवल तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) और अन्य ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। हालांकि कुछ टैंकरों को गुजरने की अनुमति मिली है, लेकिन अब तक अधिकांश जहाज होर्मुज पार नहीं कर पाए हैं। हाल ही में एक LNG टैंकर के भारत के पास दिखाई देने की खबर ने थोड़ी राहत दी है, लेकिन यह स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों, सप्लाई चेन और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा और लंबा पड़ सकता है।
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