उत्तर प्रदेश की राजनीति अब जाति और धर्म से आगे बढ़कर सीधे विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार पर आ गई है। इसी कड़ी में 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे, जिसे राज्य के विकास मॉडल में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे लगभग 594 किलोमीटर लंबा है और मेरठ से प्रयागराज तक पश्चिमी और पूर्वी यूपी को सीधे जोड़ता है। इस प्रोजेक्ट को योगी आदित्यनाथ सरकार का बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है, जिसने राज्य के कई पिछड़े जिलों को मुख्य विकास धारा से जोड़ दिया है। हापुड़, बुलंदशहर, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव और रायबरेली जैसे जिले अब सीधे हाई-स्पीड नेटवर्क से जुड़ गए हैं। इससे पहले जहां विकास कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित था, वहीं अब एक्सप्रेसवे नेटवर्क पूरे राज्य में फैल चुका है। इससे यात्रा समय घटा है, ट्रैफिक दबाव कम हुआ है और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिली है। राजनीतिक रूप से भी यह परियोजना अहम मानी जा रही है क्योंकि यूपी में एक्सप्रेसवे को लेकर हमेशा सियासी क्रेडिट की होड़ रही है। अखिलेश यादव के आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को लेकर शुरू हुई राजनीति अब योगी सरकार के व्यापक नेटवर्क से टकराती नजर आती है। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे ने मिलकर राज्य को एक मजबूत कनेक्टिविटी ढांचा दे दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे यूपी में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे, हालांकि वास्तविक आर्थिक लाभ आने वाले वर्षों में ही पूरी तरह सामने आएगा।
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