उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले को एक बार फिर बासमती चावल के बड़े निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। इसके तहत Basmati Export Development Foundation (बीईडीएफ) का नया केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जिसके लिए टांडा बिजेसी में सात एकड़ जमीन का हस्तांतरण किया गया है। केंद्रीय मंत्री Jitin Prasada ने इस मौके पर कहा कि पीलीभीत की पुरानी पहचान—उच्च गुणवत्ता वाले बासमती उत्पादन—को फिर से स्थापित करने का लक्ष्य है। यह केंद्र किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और वैज्ञानिक खेती के तरीकों का प्रशिक्षण देगा, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें। पहले जिस तरह यहां का बासमती दुनियाभर में मशहूर था, उसी स्तर को दोबारा हासिल करने की कोशिश की जा रही है, जिससे स्थानीय किसानों को सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा। इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बीज गुणन केंद्र होगा, जो किसानों को प्रमाणित, शुद्ध और रोगमुक्त बीज उपलब्ध कराएगा। इससे बासमती की किस्मों की गुणवत्ता बनी रहेगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। साथ ही युवाओं को बीज उत्पादन, जैविक खेती और नई कृषि तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। APEDA और बीईडीएफ के सहयोग से यह पहल किसानों को रासायनिक अवशेष-मुक्त (residue-free) बासमती उत्पादन की दिशा में भी आगे बढ़ाएगी, जिससे उनका उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर सके। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा बल्कि भारतीय बासमती की वैश्विक साख भी मजबूत होगी। यह केंद्र आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिसमें प्रयोगशालाएं, ऑडिटोरियम, संग्रहालय और जैविक खेती के लिए इनपुट स्टोर शामिल होंगे। साथ ही All India Coordinated Research Project (AICRP) की मान्यता मिलने से यहां नई किस्मों का परीक्षण और मूल्यांकन भी किया जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता और ज्यादा पैदावार वाली फसलें मिल सकें। कुल मिलाकर, यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है, जिससे पीलीभीत एक बार फिर देश के प्रमुख बासमती निर्यात हब के रूप में उभर सकता है।
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