खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत की रसोई तक पहुंच गया है। तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की आपूर्ति बाधित होने के बाद भारत अब तेजी से United States की ओर रुख कर रहा है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में भारत ने अमेरिका से रिकॉर्ड 3,61,000 टन LPG आयात किया, जो अब तक का सबसे बड़ा स्तर है। पहले भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% LPG पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) से मंगाता था, लेकिन Hormuz Strait में रुकावट और क्षेत्रीय संघर्ष ने सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। इस संकट के कारण अब भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में तेजी से बदलाव करना पड़ रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर पड़ा है। भारत के सबसे बड़े सप्लायर United Arab Emirates से आयात फरवरी के 6,26,000 टन से गिरकर अप्रैल में केवल 1,63,000 टन रह गया। इसी तरह Saudi Arabia, Qatar और Iran से भी आपूर्ति में गिरावट आई है। हालात संभालने के लिए भारत ने Argentina और Chile जैसे नए देशों से आयात शुरू किया है, लेकिन अभी ये मात्रा बहुत कम है और कुल जरूरत का छोटा हिस्सा ही पूरा कर पा रही है। इससे साफ है कि विकल्प मौजूद तो हैं, लेकिन तुरंत बड़े पैमाने पर बदलाव आसान नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से नहीं खुलता, तब तक भारत को महंगे और दूर के स्रोतों से LPG मंगानी पड़ेगी। इसका सीधा असर लागत और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। लंबी दूरी से आयात करने पर शिपिंग खर्च बढ़ता है, जिससे गैस की कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं। यही वजह है कि सरकार एक तरफ नए सप्लायर तलाश रही है, तो दूसरी तरफ सोलर कुकिंग और इलेक्ट्रिक विकल्पों को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी काम कर रही है। कुल मिलाकर, यह संकट भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और विविधीकरण (diversification) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।
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