बिहार में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। नई शिक्षा नीति यानी National Education Policy (NEP) 2020 के तहत अब राज्य के 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को पूरी तरह नई और अपडेटेड किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। ये किताबें National Council of Educational Research and Training (NCERT) के पैटर्न पर तैयार की गई हैं, जिससे बिहार के छात्र अब देशभर के छात्रों के समान स्तर की पढ़ाई कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ने इन पुस्तकों की छपाई शुरू कर दी है और लक्ष्य रखा गया है कि 20 मई तक सभी स्कूलों में किताबें पहुंचा दी जाएं। यह पहली बार है जब बिहार बोर्ड इतनी बड़े स्तर पर पाठ्यक्रम में बदलाव कर रहा है, जिससे छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इसमें भाषाई विविधता को विशेष महत्व दिया गया है। नए पाठ्यक्रम में कुल 12 भाषाओं को शामिल किया गया है—हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाएं जैसे मैथिली, भोजपुरी और मगही भी अब मुख्यधारा का हिस्सा बनेंगी। इसके अलावा प्राकृत, पाली, अरबी, फारसी और बांग्ला जैसी भाषाएं भी विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगी। यह बदलाव खासकर उन छात्रों के लिए फायदेमंद साबित होगा जो अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करना चाहते हैं। इससे न केवल सीखने की प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि छात्रों का अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ाव भी मजबूत होगा। शिक्षा विभाग के अनुसार, यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है, जहां अक्सर अच्छे शिक्षकों और संसाधनों की कमी रहती है। NCERT आधारित किताबें छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे JEE, NEET और UPSC की तैयारी में भी मदद करेंगी, क्योंकि इन परीक्षाओं का सिलेबस काफी हद तक NCERT पर आधारित होता है। छात्रों और अभिभावकों में इस बदलाव को लेकर उत्साह देखा जा रहा है और उम्मीद की जा रही है कि अगर समय पर किताबों का वितरण हो जाता है, तो यह बिहार की उच्च माध्यमिक शिक्षा प्रणाली में एक ऐतिहासिक सुधार के रूप में दर्ज होगा।
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