नई दिल्ली में आयोजित मिशन प्रमुखों के 11वें सम्मेलन में Narendra Modi ने भारत की विदेश नीति और कूटनीति को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। यह सम्मेलन Ministry of External Affairs द्वारा 28 से 30 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें दुनिया भर में तैनात भारतीय राजनयिकों (Ambassadors/High Commissioners) ने भाग लिया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि भारत के मिशन प्रमुख विदेशों में देश के राष्ट्रीय हितों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाएं और बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप अपनी रणनीतियों को लगातार अपडेट करें। तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन में मिशन प्रमुखों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की। इसमें भू-राजनीतिक हालात, उभरती तकनीक, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की बढ़ती भूमिका जैसे मुद्दे शामिल रहे। इसके अलावा योग सत्र, विचार-मंथन (brainstorming), और टेबल-टॉप अभ्यास जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, ताकि राजनयिकों की क्षमता और समन्वय को बेहतर बनाया जा सके। इस दौरान भारत की “गाथा” यानी वैश्विक स्तर पर उसकी उपलब्धियों और छवि को कैसे और मजबूत किया जाए, इस पर भी विशेष फोकस रहा। इस साल के सम्मेलन की थीम “वर्ष 2047 के लिए भारतीय कूटनीति में सुधार” रखी गई थी, जो भारत की आज़ादी के 100 साल पूरे होने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तय की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले दशकों में भारत न केवल आर्थिक और तकनीकी रूप से, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने मिशन प्रमुखों से कहा कि वे भारत की प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने मजबूती से रखें और देश की सॉफ्ट पावर, संस्कृति और विकास मॉडल को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें।
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