बिहार में गन्ने की खेती अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर नए इलाकों में तेजी से फैल रही है, जो राज्य के कृषि परिदृश्य में बड़ा बदलाव दर्शाता है। गन्ना उद्योग विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1.20 लाख से अधिक किसानों ने सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। खास बात यह है कि इनमें लगभग 7,000 किसान ऐसे हैं, जो गैर-चीनी मिल क्षेत्रों से आते हैं। यानी अब गन्ने की खेती केवल मिलों के आसपास सीमित नहीं रह गई, बल्कि दूर-दराज के किसान भी इस फसल को अपनाने लगे हैं। यह रुझान दर्शाता है कि गन्ना किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बनता जा रहा है और सरकार की योजनाएं भी इसे बढ़ावा दे रही हैं। दरअसल, पहले गन्ना उत्पादन मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में केंद्रित था, जहां चीनी मिलें मौजूद थीं, क्योंकि किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होती थी। लेकिन अब तकनीक, परिवहन और सरकारी नीतियों में सुधार के चलते किसान दूर के इलाकों में भी गन्ने की खेती करने लगे हैं। सरकार द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा, भुगतान में पारदर्शिता और समय पर गन्ना मूल्य मिलने जैसी पहल ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है। इसके अलावा, गन्ना एक नकदी फसल होने के कारण किसानों को स्थिर आय देने में मदद करता है, जिससे वे पारंपरिक फसलों के बजाय इसे अपनाने की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कुल मिलाकर, गन्ने की खेती का यह विस्तार राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ने की संभावना है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी मजबूत होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इसी तरह बुनियादी ढांचे, सिंचाई सुविधाओं और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाती रही, तो आने वाले समय में बिहार देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
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