हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की रिपोर्ट Women and Men in India 2025में सामने आया है कि देश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अब लड़कियां स्कूल से लेकर पोस्टग्रेजुएट (PG) स्तर तक लड़कों से आगे निकल रही हैं। सालों से चली आ रही असमानता धीरे-धीरे कम हो रही है और नई पीढ़ी इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है। पहले जहां लड़कियों को स्कूल भेजना भी चुनौती माना जाता था, वहीं अब प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक उनका नामांकन लड़कों से ज्यादा हो गया है। नई शिक्षा नीतियों और जागरूकता के कारण यह बदलाव और तेज हुआ है। साथ ही ड्रॉपआउट दर में भी गिरावट आई है, खासकर मिडिल और प्रिपरेटरी स्तर पर लड़कियों ने पढ़ाई जारी रखने में बेहतर प्रदर्शन किया है, हालांकि सेकेंडरी स्तर पर अभी भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। साक्षरता के आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। देश में कुल साक्षरता दर में पुरुषों और महिलाओं के बीच अब भी करीब 14 प्रतिशत का अंतर है, लेकिन 15 से 24 वर्ष की उम्र के युवाओं में यह अंतर घटकर मात्र 3.8 प्रतिशत रह गया है। यह दिखाता है कि नई पीढ़ी में लैंगिक समानता तेजी से बढ़ रही है। जहां 1981 में महिला साक्षरता दर केवल 30.6 प्रतिशत थी, वहीं अब यह 70 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है। यह वृद्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में बदलती सोच और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का भी संकेत देती है, जिसमें परिवार अब बेटियों की पढ़ाई को प्राथमिकता देने लगे हैं। उच्च शिक्षा के स्तर पर भी लड़कियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में लड़कियों का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) 30.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो लड़कों के 28.9 प्रतिशत से अधिक है। कुल पास होने वाले छात्रों में 51.48 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो उनकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। खास बात यह है कि एमफिल जैसे उच्च स्तर पर 76 प्रतिशत छात्राएं हैं, जबकि अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट स्तर पर भी उनकी संख्या आधे से ज्यादा है। हालांकि विषयों के चयन में अभी भी अंतर दिखाई देता है—लड़कियां आर्ट्स, साइंस, सोशल साइंस और मेडिकल क्षेत्रों में अधिक हैं, जबकि इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और आईटी जैसे क्षेत्रों में लड़कों की संख्या ज्यादा बनी हुई है। इसके अलावा औसत पढ़ाई के वर्षों और खर्च में भी अंतर देखने को मिलता है, जहां महिलाओं की औसत पढ़ाई 7.4 साल है, जबकि राष्ट्रीय औसत 8.4 साल है, और लड़कों की पढ़ाई पर खर्च भी लड़कियों की तुलना में अधिक है। इसके बावजूद, यह स्पष्ट है कि बेटियां अब शिक्षा के हर स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू रही हैं और देश की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर को बदलने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
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