यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) ने तेल निर्यात के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को बाईपास करने की तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए वह **हबशान-फुजैरा तेल पाइपलाइन** का इस्तेमाल करेगा, जिसके जरिए तेल सीधे फुजैरा बंदरगाह तक पहुंचाया जाएगा और फिर वहां से समुद्री मार्गों द्वारा दुनिया के अलग-अलग देशों को भेजा जाएगा। इस नए सिस्टम से यूएई को यह फायदा होगा कि उसे अब होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जो अक्सर भू-राजनीतिक तनाव के कारण जोखिम भरा माना जाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। लेकिन यह इलाका अक्सर तनाव, युद्ध की आशंका और सुरक्षा जोखिमों के कारण चर्चा में रहता है। ऐसे में यूएई का यह कदम उसे सप्लाई चेन में ज्यादा स्थिरता और सुरक्षा देगा। साथ ही रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई की तेल नीति में भी बदलाव हो रहा है, जिससे वह अपनी उत्पादन क्षमता को अधिक स्वतंत्र रूप से उपयोग कर सकेगा। भारत के लिए यह स्थिति काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी निर्भर है। अगर होर्मुज क्षेत्र में किसी तरह की बाधा आती है, तो तेल आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में यूएई का यह वैकल्पिक रूट भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए सप्लाई स्टेबिलिटी बढ़ा सकता है और भविष्य में ऊर्जा संकट का जोखिम कुछ हद तक कम कर सकता है।
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