China का प्रॉपर्टी मार्केट पिछले चार साल से लगातार गिरावट में है और अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि 70 बड़े शहरों में घरों की कीमतें लगभग 20 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। यानी 2005 के आसपास जो कीमतें थीं, बाजार फिर वहीं लौट आया है। एक समय चीन की GDP में रियल एस्टेट का हिस्सा करीब 25% था, इसलिए इस गिरावट का असर सीधे आम लोगों की संपत्ति पर पड़ रहा है। करोड़ों परिवारों की बचत प्रॉपर्टी में लगी हुई है, और कीमतें गिरने का मतलब है उनकी कुल संपत्ति में बड़ी कमी। विशेषज्ञ इस स्थिति को “स्लो-मोशन कोलैप्स” यानी धीरे-धीरे हो रही बड़ी गिरावट बता रहे हैं, क्योंकि 2021 से 2025 के बीच प्रॉपर्टी इंडेक्स में करीब 23% की गिरावट आ चुकी है। इस संकट का सबसे बड़ा असर बड़े डेवलपर्स पर पड़ा है। Evergrande जैसे दिग्गज 300 अरब डॉलर से ज्यादा कर्ज में डूब गए और 2025 में डीलिस्ट हो गए। Country Garden अपने कर्ज चुकाने में विफल रहा, जबकि Vanke ने 2024 में भारी घाटा दर्ज किया। नए घरों की बिक्री लगातार गिर रही है और बिना बिके घरों का स्टॉक तेजी से बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इससे साफ है कि चीन का प्रॉपर्टी सेक्टर गहरे संकट में है, जिसका असर उसकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। अब सवाल यह है कि क्या इसका असर India पर पड़ेगा? फिलहाल जवाब है—नहीं। भारत का हाउसिंग मार्केट अभी स्थिर और मजबूत स्थिति में है, जहां कीमतों में सालाना 4–10% तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारत और चीन के बाजार की बुनियाद अलग है—भारत में अभी भी घरों की मांग ज्यादा है और बड़ी आबादी के पास अपना घर नहीं है। साथ ही, यहां अनसोल्ड इन्वेंट्री भी ज्यादा समय तक नहीं रहती। इसलिए चीन जैसी बड़ी गिरावट की संभावना भारत में फिलहाल नहीं दिखती, हालांकि वैश्विक स्तर पर आर्थिक असर जरूर नजर आ सकता है।
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