राजस्थान में चना किसानों की बढ़ी परेशानी: MSP वादे पर उठे सवाल

राजस्थान में चना किसानों की मुश्किलें इस समय काफी बढ़ गई हैं, जहां सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर पूरी उपज खरीदने का वादा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह वादा पूरा होता नजर नहीं आ रहा। राज्य में कई जगहों पर खरीद शुरू ही नहीं हुई है, और जहां शुरू हुई है वहां 40 क्विंटल की सीमा (कैप) लगाकर किसानों की बाकी उपज खरीदने से इनकार किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर किसान महापंचायत ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हस्तक्षेप की मांग की है। खरीद प्रक्रिया में मुख्य भूमिका NAFED और RAJFED निभा रहे हैं। आरोप है कि राजफेड के जरिए किए गए रजिस्ट्रेशन के बावजूद किसानों से पूरी उपज नहीं खरीदी जा रही, जबकि SOP के अनुसार ऐसा किया जाना चाहिए। इस साल चने का MSP 5,875 रुपये प्रति क्विंटल तय है, लेकिन खुले बाजार में कीमत 5,000–5,200 रुपये के बीच चल रही है। यानी किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 700–800 रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या 40 क्विंटल की सीमा है, जिसके कारण बड़े और मध्यम किसान अपनी अधिकांश उपज MSP पर नहीं बेच पा रहे। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी किसान ने 400 क्विंटल चना उत्पादन किया, तो सिर्फ 40 क्विंटल ही MSP पर बिकेगा, जबकि बाकी उसे कम कीमत पर बाजार में बेचना पड़ेगा। इससे एक किसान को 2.5 से 3 लाख रुपये तक का नुकसान हो सकता है, जो उसकी सालभर की कमाई पर सीधा असर डालता है। किसान संगठनों ने मांग की है कि या तो यह सीमा तुरंत हटाई जाए और पूरी उपज खरीदी जाए, या फिर “प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम (PDPS)” लागू की जाए। इस योजना के तहत किसान बाजार में बिक्री करेंगे और MSP व बाजार मूल्य के बीच का अंतर सरकार उन्हें देगी। फिलहाल सभी की नजरें केंद्र सरकार और खासकर कृषि मंत्री के फैसले पर टिकी हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा बड़े किसान आंदोलन का रूप भी ले सकता है और राज्य में कृषि अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है।

Manisha Saini
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