ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब खुले समुद्र में भी दिखने लगा है, जहां तेल टैंकरों को लेकर ‘चूहे-बिल्ली’ जैसा खेल चल रहा है। ताज़ा मामले में ईरान का एक विशाल तेल टैंकर DERYA अमेरिकी निगरानी और कथित घेराबंदी को चकमा देकर इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में पहुंच गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह टैंकर लोम्बोक जलडमरूमध्य (Lombok Strait) के रास्ते रियाउ द्वीपों की ओर बढ़ा, जिससे यह चर्चा तेज हो गई है कि ईरान पारंपरिक रास्तों के बजाय वैकल्पिक या “कम निगरानी वाले” समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर रहा है। असल में “सीक्रेट रास्ता” कोई जादुई नया रास्ता नहीं होता, बल्कि रणनीति और तकनीक का मिश्रण होता है। आम तौर पर तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख मार्गों से गुजरते हैं, जहां निगरानी सबसे ज्यादा रहती है। लेकिन ऐसे मामलों में जहाज कम भीड़ वाले रास्तों जैसे लोम्बोक या सुंडा स्ट्रेट का उपयोग कर सकते हैं, जो लंबा जरूर होता है लेकिन निगरानी अपेक्षाकृत कम रहती है। इसके अलावा कुछ टैंकर AIS (Automatic Identification System) सिग्नल को बंद या छुपाकर चलते हैं, बीच समुद्र में जहाज-से-जहाज (ship-to-ship) ट्रांसफर करते हैं, या झंडा (flag) और रूट बदलकर पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं। इस तरह की गतिविधियों का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ता है। जब ईरान के टैंकर इस तरह प्रतिबंधों से बचते हुए तेल सप्लाई जारी रखते हैं, तो एक तरफ बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो जाता है। यही कारण है कि हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई देशों की चिंता भी बढ़ गई है। कुल मिलाकर, यह “सीक्रेट रूट” कम और “स्मार्ट नेविगेशन + रणनीतिक बचाव” ज्यादा है, जो समुद्री राजनीति और व्यापार दोनों को प्रभावित कर रहा है।
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