महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा ने समाजशास्त्र (Sociology) में एक नया अकादमिक मॉड्यूल शुरू किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व शैली का अध्ययन शामिल किया गया है। यह कोर्स “Sociology of Patriotism” यानी “देशभक्ति का समाजशास्त्र” नाम से दो वर्षीय मास्टर प्रोग्राम का हिस्सा बनाया गया है। इस पहल का उद्देश्य राजनीतिक नेतृत्व को समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझना बताया गया है, ताकि छात्र यह जान सकें कि नेतृत्व का समाज, नीति और राष्ट्र निर्माण पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस मॉड्यूल के तहत “मोदी तत्व” नाम से एक विशेष भाग शामिल किया गया है, जिसमें पीएम मोदी की करिश्माई नेतृत्व शैली और उनके निर्णयों के सामाजिक प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए समाजशास्त्र में पहले से मौजूद सिद्धांतों, जैसे जर्मन समाजशास्त्री मैक्स वेबर के “करिश्माई सत्ता” सिद्धांत का उपयोग किया जाएगा, जिसकी तुलना महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे वैश्विक नेताओं के अध्ययन से की जाती है। साथ ही इस कोर्स में नोटबंदी, डिजिटल इंडिया, फास्टैग और जल शक्ति मंत्रालय जैसी सरकारी नीतियों के सामाजिक प्रभावों का भी विश्लेषण किया जाएगा। कोर्स को चार हिस्सों में विभाजित किया गया है, जिसमें मीडिया और डिजिटल राष्ट्रवाद, नागरिकता और असहमति, और वैश्वीकरण व पहचान की राजनीति जैसे विषय शामिल हैं। यूनिवर्सिटी का कहना है कि यह पाठ्यक्रम छात्रों के फील्डवर्क और रिसर्च पर आधारित है, जिसमें गांवों और समाज में किए गए अध्ययन भी शामिल हैं। साथ ही इसमें ऐतिहासिक व्यक्तित्वों जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज और सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय के विचारों को भी जोड़ा गया है। कुल मिलाकर यह मॉड्यूल आधुनिक राजनीति, राष्ट्रवाद और नेतृत्व को एक अकादमिक और विश्लेषणात्मक दृष्टि से समझने की कोशिश है।
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