All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए गंभीर रीढ़ की विकृतियों (spinal deformities) के इलाज के लिए एक नई और उन्नत सर्जिकल तकनीक विकसित की है। इस तकनीक को एक बड़े ब्रेकथ्रू के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इससे उन मरीजों के इलाज की संभावना बढ़ गई है, जिनके लिए पहले सर्जरी बेहद जोखिमपूर्ण मानी जाती थी या जिनके पास सीमित उपचार विकल्प थे। AIIMS के अनुसार, इस तकनीक का उपयोग पिछले लगभग सात वर्षों से किया जा रहा है और इसके परिणाम काफी सकारात्मक रहे हैं। यह नई तकनीक एक जटिल स्पाइन सर्जरी का संशोधित रूप है, जिसे मेडिकल भाषा में Posterior Vertebral Column Resection कहा जाता है। इसे वर्ष 2020 में एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल में भी प्रकाशित किया गया था। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य रीढ़ की गंभीर विकृतियों को सुरक्षित तरीके से ठीक करना है, जिसमें पहले की तुलना में जटिलताओं का जोखिम कम होता है और सर्जरी के दौरान मरीज की स्थिरता अधिक बनी रहती है। AIIMS ने बताया कि इस संशोधित तकनीक में रीढ़ की हड्डी के कुछ हिस्सों को सर्जरी के अंतिम चरण तक सुरक्षित रखा जाता है, जिससे ऑपरेशन के दौरान स्थिरता बनी रहती है और जटिलताओं की संभावना कम हो जाती है। इसका सीधा फायदा यह है कि मरीजों की रिकवरी बेहतर होती है और सर्जरी अधिक सुरक्षित बन जाती है। यह उपलब्धि भारत में न्यूरो-सर्जरी और ऑर्थोपेडिक उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति मानी जा रही है, जिससे भविष्य में हजारों मरीजों को लाभ मिल सकता है।
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