Supreme Court of India ने एक अहम मामले में Election Commission of India के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें मतगणना सुपरवाइजर के रूप में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति का निर्देश दिया गया था। यह फैसला पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक पार्टी Trinamool Congress (TMC) द्वारा दायर याचिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति P. S. Narasimha और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रत्येक काउंटिंग टेबल पर पहले से ही एजेंट, सुपरवाइजर और ऑब्जर्वर मौजूद होते हैं, इसलिए केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति पर आपत्ति का आधार कमजोर दिखाई देता है। सुनवाई में चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि रिटर्निंग ऑफिसर राज्य सरकार के कर्मचारी होते हैं और वही अन्य अधिकारियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी निभाते हैं। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने पारदर्शिता के लिए सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग उठाई। इस पर आयोग ने कोर्ट को बताया कि सभी फुटेज 45 दिनों तक सुरक्षित रखे जाएंगे। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव आयोग के सर्कुलर को “letter and spirit” के साथ लागू किया जाना चाहिए, यानी उसे पूरी तरह और सख्ती से पालन करना होगा। यह फैसला चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और आयोग की स्वतंत्रता को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
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