नई दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा लिए गए ताबड़तोड़ फैसलों में देश के करोड़ों किसानों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की गई है। सरकार ने कपास उत्पादन और गुणवत्ता सुधारने के लिए ‘कपास कांती’ मिशन को मंजूरी दी है, जो 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगा। इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब ₹5659.22 करोड़ खर्च किए जाएंगे और इसका सीधा लाभ देश के लगभग 32 लाख कपास किसानों को मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2030-31 तक कपास उत्पादन बढ़ाकर 498 लाख गांठ तक पहुंचाया जाए, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इस मिशन के तहत आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, और खेती के उन्नत तरीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। सरकार इस मिशन को अपने ‘5-F विजन’ (Farm to Fibre, Fibre to Factory, Factory to Fashion, Fashion to Foreign) के तहत लागू कर रही है, जिससे खेती से लेकर निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा सके। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह योजना न केवल किसानों के लिए फायदेमंद होगी बल्कि भारत को वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में भी मजबूत बनाएगी। इससे उद्योग, रोजगार और निर्यात—तीनों क्षेत्रों को गति मिलेगी, और देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलेगा। इसके साथ ही सरकार ने गन्ना किसानों को राहत देते हुए फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (FRP) बढ़ाकर ₹365 प्रति क्विंटल कर दिया है, जो पहले ₹355 था। यह नई दर 2026-27 शुगर सीजन (1 अक्टूबर से) लागू होगी। इस फैसले से देश के लगभग 5 करोड़ गन्ना किसानों और करीब 5 लाख चीनी मिल कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा। बढ़ा हुआ FRP किसानों की आय बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा। कुल मिलाकर, ये फैसले सरकार के किसान-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाते हैं और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने की कोशिश माने जा रहे हैं।
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