श्रम संहिता vs राज्य कानून: कंपनियों के सामने बढ़ी कानूनी उलझन

भारत में Labour Codes और राज्यों के Shops and Establishments Act के बीच टकराव से कंपनियों के लिए अनुपालन (compliance) को लेकर बड़ी अनिश्चितता पैदा हो गई है। काम के घंटे, ओवरटाइम, छुट्टी और लीव एन्कैशमेंट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों कानूनों में अलग-अलग प्रावधान होने के कारण कंपनियां दुविधा में हैं कि किस नियम का पालन करें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ओवरलैपिंग के कारण न केवल भ्रम बढ़ेगा बल्कि कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है और नियमों के उल्लंघन का जोखिम भी बना रहेगा। समस्या की जड़ यह है कि केंद्र सरकार की श्रम संहिताएं एक समान ढांचा देने की कोशिश करती हैं, जबकि हर राज्य अपने हिसाब से नियम बनाता है। उदाहरण के तौर पर व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियाँ संहिता, 2020 में काम के घंटे 8 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे प्रति सप्ताह तय किए गए हैं, लेकिन कई राज्यों के कानून इससे ज्यादा सख्त सीमाएं तय करते हैं। इससे मल्टी-स्टेट (कई राज्यों में काम करने वाली) कंपनियों को अलग-अलग नियमों का पालन करना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक बोझ और जटिलता बढ़ जाती है। उद्योग संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग की है, ताकि दोहरे नियमों की इस स्थिति को खत्म किया जा सके। फिलहाल कंपनियां या तो सभी नियमों को लागू करने के लिए अतिरिक्त लागत उठा रही हैं या फिर अनजाने में नियमों के उल्लंघन का खतरा झेल रही हैं। कुल मिलाकर, यह स्थिति दिखाती है कि भारत में श्रम कानूनों को सरल और एकरूप बनाने की जरूरत अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है।

Manisha Saini
49
Get In Touch

Dharmakshetra, Shiv Shakti Mandir, Babu Genu Marg,
Sector 8, Rama Krishna Puram,
New Delhi, Delhi 110022

+91 80031 98250

info@mysba.co.in

Follow Us
Useful link

About Us

Contact Us