केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा देने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव भी स्वीकार कर लिया है। सरकार का कहना है कि अब ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और गरिमा की रक्षा उसी तरह की जाएगी जैसे राष्ट्रगान और तिरंगे की होती है। प्रस्तावित संशोधन लागू होने के बाद यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालता है, उसका अपमान करता है या सार्वजनिक कार्यक्रमों में उसका अनादर करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। वर्तमान कानून के तहत राष्ट्रगान, संविधान और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान पर जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है और अब राष्ट्रीय गीत को भी इसी कानूनी दायरे में शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि देश इस समय ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है, इसलिए यह निर्णय राष्ट्रीय भावना और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करने वाला कदम साबित होगा। ‘वंदे मातरम’ गीत की रचना महान साहित्यकार Bankim Chandra Chattopadhyay ने की थी और यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया था। आजादी की लड़ाई में हजारों क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करते हुए ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन चलाए थे। संसद में पिछले वर्ष दिसंबर में इसकी 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर विशेष चर्चा हुई थी, जिसमें कई सांसदों ने इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की मांग उठाई थी। उसी के बाद केंद्र सरकार ने इस विषय पर कानूनी और संवैधानिक पहलुओं का अध्ययन कराया और अब कैबिनेट ने इस महत्वपूर्ण फैसले को मंजूरी दे दी है। सरकार के सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में स्कूलों, सरकारी कार्यक्रमों और राष्ट्रीय आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं। इससे पहले गृह मंत्रालय की ओर से इसके सम्मानजनक गायन और प्रस्तुति को लेकर दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं। मोदी कैबिनेट के इस फैसले के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है, इसलिए उसे समान सम्मान मिलना चाहिए। वहीं कुछ विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे पर विस्तृत कानूनी बहस की मांग भी उठाई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद लिया गया यह फैसला सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी राजनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में संसद और देशभर में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा देखने को मिल सकती है। फिलहाल केंद्र सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर वह किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी और ‘वंदे मातरम’ को भी अब उसी गरिमा के साथ देखा जाएगा जैसा राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को माना जाता है।
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