भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार बढ़ती लागत और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूती के साथ आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry (FICCI) द्वारा जारी नवीनतम मैन्युफैक्चरिंग सर्वे के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4) में भारतीय निर्माण क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। सर्वे में शामिल करीब 93 प्रतिशत कंपनियों ने उम्मीद जताई है कि उनका उत्पादन या तो समान रहेगा या उसमें वृद्धि होगी। पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 91 प्रतिशत था, जिससे स्पष्ट है कि उद्योग जगत में भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। सर्वे में बड़े उद्योगों के साथ-साथ एमएसएमई सेक्टर की कंपनियों को भी शामिल किया गया, जिनका संयुक्त वार्षिक कारोबार 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार मजबूत घरेलू मांग, आर्थिक स्थिरता और निवेश की उम्मीदों ने निर्माण क्षेत्र को सहारा दिया है। हालांकि कंपनियों ने यह भी माना कि कच्चे माल की कीमतों, लॉजिस्टिक्स खर्च और वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद उद्योग विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। FICCI के 69वें सर्वे में ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स, केमिकल्स, फर्टिलाइजर, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीन टूल्स, मेटल और टेक्सटाइल्स जैसे आठ प्रमुख सेक्टरों को शामिल किया गया। सर्वे में सामने आया कि घरेलू ऑर्डर और मांग को लेकर भी उद्योग जगत में काफी आशावाद बना हुआ है। लगभग 89 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उन्हें बाजार में मांग समान या उससे अधिक रहने की उम्मीद है। वहीं निर्यात को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं और करीब 80 प्रतिशत कंपनियों ने आने वाले समय में निर्यात बढ़ने या स्थिर रहने की संभावना जताई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि औसत उत्पादन क्षमता उपयोग घटकर लगभग 72 प्रतिशत पर आ गया है, लेकिन इसके बावजूद निवेश का माहौल स्थिर बना हुआ है। कंपनियों का मानना है कि अगले छह महीनों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए नए निवेश किए जा सकते हैं। सर्वे के अनुसार ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल सेक्टर में क्षमता उपयोग सबसे अधिक रहा, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीन टूल्स सेक्टर में अपेक्षाकृत कम उपयोग दर्ज किया गया। हालांकि उद्योग जगत के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। कंपनियों ने वैश्विक व्यापार प्रतिबंध, टैरिफ, आर्थिक अनिश्चितता, कच्चे माल की कमी और कुशल श्रमिकों की कमी को बड़ी समस्याएं बताया है। सर्वे के अनुसार करीब 70 प्रतिशत कंपनियों ने माना कि उत्पादन लागत का दबाव काफी बढ़ गया है, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 57 प्रतिशत था। इसका मुख्य कारण कच्चे माल की ऊंची कीमतें, मुद्रा अवमूल्यन और बढ़ते ट्रांसपोर्ट व ऊर्जा खर्च हैं। इसके बावजूद रोजगार के मोर्चे पर अच्छी खबर सामने आई है। करीब 41 प्रतिशत कंपनियों ने अगले तीन महीनों में नई भर्तियां करने की योजना बनाई है। साथ ही 79 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उन्हें पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध हो रहे हैं, हालांकि 21 प्रतिशत कंपनियों ने कुशल कर्मचारियों की कमी की समस्या बताई। क्षेत्रवार विकास अनुमान में केमिकल्स, फर्टिलाइजर और फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर को सबसे मजबूत स्थिति में माना गया है, जबकि ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल सेक्टर में मध्यम गति से विकास की उम्मीद जताई गई है। कुल मिलाकर सर्वे से संकेत मिलता है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर चुनौतियों के बावजूद मजबूत घरेलू मांग, निर्यात अवसरों और निवेश योजनाओं के सहारे आगे बढ़ रहा है और आने वाली तिमाहियों में भी विकास की रफ्तार बनाए रख सकता है।
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