केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल मैनेजमेंट कमिटी (SMC) को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनका उद्देश्य स्कूलों में जनभागीदारी बढ़ाना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना है। नई व्यवस्था के तहत अब हर स्कूल की SMC में 75 प्रतिशत सदस्य छात्रों के अभिभावक या संरक्षक होंगे। इतना ही नहीं, समिति का अध्यक्ष भी अभिभावकों में से ही चुना जाएगा। सरकार का मानना है कि माता-पिता की सीधी भागीदारी से स्कूलों में बेहतर फैसले लिए जा सकेंगे और बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार होगा। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत यह कदम स्कूलों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब अभिभावक सीधे स्कूल प्रबंधन का हिस्सा बनेंगे तो बच्चों की उपस्थिति, पढ़ाई और स्कूल की गतिविधियों पर भी सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। इससे स्कूलों और परिवारों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी। नई गाइडलाइंस के अनुसार SMC में महिलाओं की भागीदारी भी अनिवार्य रूप से बढ़ाई गई है। समिति में कम से कम 50 प्रतिशत महिला सदस्य होंगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने कहा कि SMC का उद्देश्य केवल प्रशासनिक व्यवस्था संभालना नहीं, बल्कि स्कूलों के लर्निंग आउटकम को बेहतर बनाना है। वहीं स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव Sanjay Kumar के अनुसार स्थानीय समुदाय की मजबूत भागीदारी से छात्रों और स्कूलों से जुड़े फैसले तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किए जा सकेंगे। नई व्यवस्था में SMC की दो सब-कमेटियां भी बनाई जाएंगी — एक अकैडमिक कमिटी, जो पढ़ाई की गुणवत्ता, किताबों और क्लासरूम टीचिंग पर ध्यान देगी, जबकि दूसरी स्कूल बिल्डिंग कमिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और भवन निर्माण कार्यों की निगरानी करेगी। इससे स्कूलों में केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि भवन, स्वच्छता, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं पर भी लगातार नजर रखी जा सकेगी। गाइडलाइंस में स्कूलों के आकार के अनुसार SMC सदस्यों की संख्या भी तय की गई है। 100 छात्रों तक वाले स्कूलों में 12-15 सदस्य, 100 से 500 छात्रों वाले स्कूलों में 15-20 सदस्य और 500 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों में 20-25 सदस्य होंगे। बालवाटिका से 12वीं तक के लिए एक ही SMC बनाई जाएगी और उसका कार्यकाल दो वर्ष का होगा। समिति में बाकी 25 प्रतिशत सदस्य शिक्षकों, स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, पूर्व छात्रों, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में से चुने जाएंगे। अब SMC समग्र शिक्षा, पीएम पोषण योजना, पीएम श्री स्कूल्स और उल्लास जैसी सरकारी योजनाओं की निगरानी भी करेगी, ताकि उनका लाभ सही तरीके से छात्रों तक पहुंच सके। सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से स्कूलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा तथा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के स्कूलों को समान रूप से मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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