टाटा ट्रस्ट्स का विवाद पहुंचा हाई कोर्ट, 8 मई की अहम बैठक पर मंडराया संकट

देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह [Tata Group](https://www.tata.com?utm_source=chatgpt.com) से जुड़ा एक बड़ा विवाद अब बंबई हाई कोर्ट पहुंच गया है। टाटा ट्रस्ट्स की 8 मई को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले दायर की गई एक याचिका में इस बैठक को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि Sir Ratan Tata Trust ने महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट कानून में किए गए संशोधनों का पालन नहीं किया है। यह मामला इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि टाटा ट्रस्ट्स के पास (https://www.tata.com/about-us/tata-group-our-heritage/tata-sonsutm_source=chatgpt.com) में बहुलांश हिस्सेदारी है और वही पूरे टाटा ग्रुप की रणनीतिक दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। सर रतन टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में करीब 23.56 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जा रही है। ऐसे में इस विवाद का असर टाटा समूह की शीर्ष स्तर की व्यवस्थाओं और फैसलों पर भी पड़ सकता है। बंबई हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट (संशोधन) एक्ट 2025 के तहत स्थायी ट्रस्टियों की संख्या कुल ट्रस्टियों की क्षमता के एक-चौथाई तक सीमित होनी चाहिए। लेकिन सर रतन टाटा ट्रस्ट में छह ट्रस्टियों में से तीन स्थायी ट्रस्टी हैं, जो नियमों के अनुसार तय सीमा से अधिक हैं। याचिकाकर्ता सुरेश तुलसीराम पाटिलखेड़े का तर्क है कि 1 सितंबर 2025 से लागू हुए नए नियमों के बाद ट्रस्ट का मौजूदा ढांचा कानून के अनुरूप नहीं है, इसलिए उसके बाद लिए गए फैसलों को अवैध माना जाना चाहिए। वर्तमान में ट्रस्ट के स्थायी ट्रस्टियों में Jimmy Naval Tata, Noel Tata और Jehangir H C Jehangir शामिल हैं। नए नियमों के मुताबिक यदि तीन स्थायी ट्रस्टी बनाए रखने हैं, तो ट्रस्टियों की कुल संख्या बढ़ाकर 12 करनी होगी। यह मामला इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि 8 मई को होने वाली बैठक को टाटा ट्रस्ट्स के लिए बेहद अहम माना जा रहा था। खबरों के अनुसार इस बैठक में [Tata Sons](https://www.tata.com/about-us/tata-group-our-heritage/tata-sons?utm_source=chatgpt.com) के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के प्रतिनिधित्व की समीक्षा की जानी थी। फिलहाल टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन Noel Tata और वाइस चेयरमैन Venu Srinivasan टाटा संस बोर्ड में ट्रस्ट के नॉमिनी के रूप में शामिल हैं। अगर हाई कोर्ट इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करते हुए कोई अंतरिम राहत देता है, तो 8 मई की बैठक टल सकती है या उसके फैसलों पर असर पड़ सकता है। उद्योग जगत की नजरें अब इस कानूनी विवाद पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर देश के सबसे प्रभावशाली कारोबारी समूहों में से एक की आंतरिक संरचना और भविष्य की रणनीति पर पड़ सकता है।

Manisha Saini
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