88 घंटे की लड़ाई के बाद बदली भारत की सैन्य रणनीति, सेना से लेकर एयरफोर्स तक बड़े बदलाव

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बीते एक साल में भारत की सैन्य रणनीति में बड़े और तेज बदलाव देखने को मिले हैं। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी संरचना, तकनीक और हथियारों में व्यापक सुधार किए हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार 88 घंटे तक चले संघर्ष ने यह साफ कर दिया कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं लड़े जाएंगे, बल्कि ड्रोन, रियल टाइम इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सटीक हमलों की भूमिका सबसे अहम होगी। इसी अनुभव के आधार पर भारतीय सेना ने नई युद्ध इकाइयों का गठन शुरू किया है और आधुनिक हथियार प्रणालियों को तेजी से शामिल किया जा रहा है। सेना ने लंबी दूरी तक निगरानी और टारगेट पर सटीक हमले के लिए लॉइटरिंग म्यूनिशन, कामिकाजी ड्रोन और लेजर गाइडेड रॉकेट्स को अपनी ताकत का हिस्सा बनाया है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में टेदर्ड ड्रोन भी शामिल किए गए हैं, जो लगातार आसमान में रहकर निगरानी करने में सक्षम हैं। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई नई यूनिट्स बनाई हैं, जिनमें भैरव बटालियन, रुद्र ब्रिगेड और अश्नि ड्रोन प्लाटून सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। भैरव बटालियन को लाइट कॉम्बैट यूनिट के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें पैदल सेना के साथ आर्टिलरी, एयर डिफेंस और सिग्नल यूनिट्स को एक साथ जोड़ा गया है। वहीं रुद्र ब्रिगेड में जरूरत के हिसाब से अलग-अलग सैन्य शाखाओं की यूनिट्स शामिल की जा रही हैं, ताकि युद्ध के दौरान तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सके। सेना की हर पैदल बटालियन में अब अश्नि प्लाटून बनाई गई है, जो ड्रोन ऑपरेशन और निगरानी का काम करेगी। इसके अलावा पारंपरिक आर्टिलरी रेजिमेंट्स को शक्तिबाण रेजिमेंट में बदला जा रहा है, जहां केवल तोपों की जगह ड्रोन, स्वॉर्म ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सेना की मारक क्षमता और हमले की रेंज पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों को भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते नाकाम किया था। इसके बाद भारत ने अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को और मजबूत करने पर तेजी से काम शुरू किया। ‘आकाशतीर’ सिस्टम को अपग्रेड किया जा रहा है, जो अलग-अलग रडार से मिलने वाले डेटा को रियल टाइम में जोड़कर पूरी स्थिति की स्पष्ट तस्वीर देता है। इससे दुश्मन के हमलों पर तुरंत प्रतिक्रिया देना आसान हो गया है। इसके साथ ही 24 घंटे निगरानी के लिए हाई एल्टीट्यूड शैडो सैटेलाइट और स्वदेशी ‘सुदर्शन चक्र’ मिशन पर भी तेजी से काम चल रहा है। भारतीय वायुसेना ने भी एयर पावर बढ़ाने पर फोकस किया है। नए Dassault Rafale फाइटर जेट्स को शामिल करने की तैयारी जारी है, जबकि S-400 Triumf एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी और पांचवीं यूनिट जल्द मिलने की संभावना है। नौसेना में भी पिछले एक साल में नौ नए युद्धपोत शामिल किए गए हैं और पांच अन्य जल्द बेड़े का हिस्सा बन सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से भारत की सैन्य क्षमता पहले की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक, तेज और तकनीकी रूप से मजबूत हुई है।

Manisha Saini
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