ICAR ने तैयार की ये खास वैरायटी अब हल्दी की खेती होगी फायदे का सौदा

Indian Council of Agricultural Research (ICAR) के अंतर्गत ICAR-Indian Institute of Spices Research ने हल्दी की एक नई और उन्नत किस्म विकसित की है, जिसका नाम ‘प्रगति’ रखा गया है। यह किस्म खास तौर पर जलवायु परिवर्तन और खेती में बढ़ती चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार ‘प्रगति’ हल्दी की सबसे बड़ी खासियत इसकी उच्च उपज क्षमता और कम समय में तैयार होना है। यह फसल लगभग 180 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को जल्दी उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिल सकता है। इसके अलावा यह किस्म नेमाटोड जैसे हानिकारक कीटों के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी मानी जाती है, जिससे फसल को कम नुकसान होता है। इस हल्दी में लगभग 5.55 प्रतिशत करक्यूमिन और करीब 13 प्रतिशत ओलियोरेसिन पाया जाता है, जो इसकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य को बढ़ाता है। यही कारण है कि यह प्रोसेसिंग और निर्यात के लिए भी उपयुक्त मानी जा रही है। यह किस्म विशेष रूप से Kerala, Tamil Nadu, Andhra Pradesh, Telangana, Karnataka, West Bengal और Chhattisgarh में खेती के लिए उपयुक्त बताई गई है। हल्दी की खेती के लिए खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसे तैयार करना जरूरी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार खेत तैयार करते समय प्रति हेक्टेयर 75 क्विंटल नाडेप खाद या 200 से 250 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए। इसके साथ 120 किलो नाइट्रोजन, 80 किलो फास्फोरस और 80 किलो पोटाश अंतिम जुताई के समय मिट्टी में मिलाना लाभदायक माना जाता है। हल्दी की बुवाई 40×20 सेंटीमीटर की दूरी पर करनी चाहिए और बीज या प्रकंद को लगभग 4 सेंटीमीटर गहराई में लगाना चाहिए। बुवाई से पहले 20–25 ग्राम के हल्दी प्रकंद को 0.3 प्रतिशत कॉपर ऑक्सीक्लोराइड घोल से उपचारित करना बेहतर माना जाता है, जिससे रोगों का खतरा कम हो जाता है। किसान चाहें तो बगीचों में भी हल्दी की खेती कर सकते हैं। आम और अमरूद के बागानों में इंटरक्रॉपिंग के रूप में हल्दी उगाना काफी फायदेमंद माना जाता है, खासकर छायादार क्षेत्रों में। हल्दी को एक सुपरफूड माना जाता है क्योंकि इसमें मौजूद करक्यूमिन में शक्तिशाली सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह इम्यूनिटी बढ़ाने, जोड़ों के दर्द में राहत देने, पाचन सुधारने और त्वचा को निखारने में मददगार मानी जाती है। आजकल हल्दी का उपयोग केवल मसाले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई औषधियों और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती मांग और बेहतर किस्मों के कारण आने वाले समय में हल्दी की खेती किसानों के लिए काफी फायदे का सौदा साबित हो सकती है।

Manisha Saini
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