राजस्थान में इस बार चना बेचने वाले किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसान संगठनों के अनुसार सरकार की खरीद व्यवस्था सही तरीके से काम नहीं कर रही, जिसके कारण किसानों को अपना चना बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि किसानों को हर क्विंटल चने पर लगभग 775 रुपये तक का घाटा हो रहा है। सरकार की “मूल्य समर्थन योजना” (MSP) के तहत किसानों से तय समर्थन मूल्य पर चना खरीदने का नियम है, लेकिन खरीद केंद्रों की कमी और धीमी प्रक्रिया के कारण किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। राजस्थान में चना उत्पादन काफी अधिक होने के बावजूद खरीद व्यवस्था कमजोर दिखाई दे रही है। जहां मध्य प्रदेश में 3,627 खरीद केंद्र बनाए गए हैं, वहीं राजस्थान में केवल 773 केंद्र हैं। इनमें भी कई केंद्रों पर खरीद शुरू नहीं हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार 30 अप्रैल तक 261 केंद्रों पर एक भी खरीद नहीं हुई। इसका असर यह हुआ कि किसानों को मजबूरी में मंडियों में कम दाम पर चना बेचना पड़ा। जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में खरीद प्रक्रिया तेजी से चल रही है, राजस्थान में लगभग 23 लाख टन उत्पादन के मुकाबले बहुत कम खरीद हो पाई है। किसानों का कहना है कि पंजीकरण प्रक्रिया भी काफी कठिन है। राजस्थान में जनआधार कार्ड के आधार पर पंजीकरण किया जाता है, जिससे एक परिवार के केवल एक सदस्य की उपज ही खरीदी जा सकती है। दूसरी ओर नेफेड और एनसीसीएफ आधार कार्ड के आधार पर खरीद करते हैं, जिससे परिवार के सभी खातेदार अपनी फसल बेच सकते हैं। किसान संगठनों ने मांग की है कि खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और पंजीकरण प्रक्रिया आसान बनाई जाए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके और उन्हें घाटे से राहत मिले।
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