भारत में पेट्रोल की “केमिस्ट्री” तेजी से बदल रही है। पहले E10 और फिर E20 फ्यूल ब्लेंडिंग लागू करने के बाद अब केंद्र सरकार E21 और आगे चलकर E25 ब्लेंडेड पेट्रोल लाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2027 तक E21 और 2029 तक E25 फ्यूल का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इसका मतलब होगा कि पेट्रोल में 25 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जा सकेगा। सरकार इस बदलाव को अचानक लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है ताकि ऑटोमोबाइल कंपनियों और वाहन मालिकों को किसी तरह की परेशानी न हो। हाल के समय में E20 फ्यूल को लेकर माइलेज कम होने, मेंटनेंस बढ़ने और इंजन पार्ट्स पर असर जैसी शिकायतें सामने आई थीं, इसलिए सरकार इस बार वाहन कम्पैटिबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास ध्यान दे रही है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी इथेनॉल ब्लेंडिंग को देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और विदेशी मुद्रा बचत से जोड़ते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया है। भारत लंबे समय से कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहा है और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग को रणनीतिक कदम मान रही है। सरकारी अनुमान के अनुसार, 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग से हर साल करीब 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की बचत हो रही है और लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और कृषि आधारित स्रोतों से तैयार किया जाता है, इसलिए इससे किसानों को भी अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। सरकार का मानना है कि E25 तक पहुंचने से देश की ईंधन सुरक्षा मजबूत होगी, पेट्रोल की खपत कम होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी। हालांकि, ऑटो सेक्टर के लिए यह बड़ा बदलाव होगा क्योंकि कंपनियों को नए इंजन डिजाइन, फ्यूल सिस्टम और सप्लाई चेन को भविष्य के फ्यूल के हिसाब से तैयार करना पड़ेगा।
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