Narendra Modi 15 मई को अबू धाबी पहुंचेंगे, जहां से उनकी पांच देशों की विदेश यात्रा की शुरुआत होगी। इस दौरे में संयुक्त अरब अमीरात के अलावा नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल कीमतों में तेजी ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर अमेरिका-ईरान संघर्षविराम की नाजुक स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे माहौल में भारत और United Arab Emirates के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहने की संभावना है। अबू धाबी में प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात यूएई के राष्ट्रपति Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan से होगी। दोनों नेताओं की पिछले पांच महीनों में यह दूसरी आमने-सामने की बैठक होगी। जनवरी में यूएई राष्ट्रपति की नई दिल्ली यात्रा के दौरान तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, व्यापार और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कई समझौते हुए थे। इस बार बातचीत का मुख्य केंद्र ऊर्जा सुरक्षा माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार यूएई पिछले वर्ष भारत के लिए कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत रहा और उसने भारत की लगभग 11 प्रतिशत जरूरत पूरी की। वहीं एलएनजी के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों और ADNOC Gas के बीच दीर्घकालिक समझौते हुए हैं, जिनके तहत हर साल 45 लाख टन गैस आपूर्ति की जाएगी। भारत आज यूएई के एलएनजी का सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है। भारत और यूएई के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। यूएई भारत की एलपीजी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पूरा करता है और भारत के पेट्रोलियम निर्यात का दूसरा सबसे बड़ा गंतव्य भी है। भारतीय कंपनियों ने यूएई के ऊर्जा क्षेत्र में 1.2 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इसी वर्ष जनवरी में Bharat PetroResources Limited ने अबू धाबी के ऑनशोर ब्लॉक-1 में तेल की खोज की पुष्टि की, जो इस क्षेत्र में भारत की पहली बड़ी अपस्ट्रीम खोज मानी जा रही है। इसके अलावा यूएई भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम में साझेदारी करने वाला पहला देश भी है और उसने मंगलुरु स्थित ISPRL सुविधा में 50 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल स्टोर किया हुआ है। दोनों देशों के बीच डिजिटल और व्यापारिक सहयोग भी तेजी से बढ़ा है। भारत के यूपीआई भुगतान सिस्टम को यूएई के AANI प्लेटफॉर्म से जोड़ने के बाद सीमा पार लेनदेन काफी आसान हुआ है, जिसका फायदा कारोबारियों और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय को मिल रहा है। वर्तमान में यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और पिछले 25 वर्षों में सातवां सबसे बड़ा विदेशी निवेश स्रोत है। पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और यूएई के दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को और मजबूती देने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
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