भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। Directorate General of Foreign Trade द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी के निर्यात की नीति को ‘Restricted’ से बदलकर ‘Prohibited’ कर दिया गया है। यह प्रतिबंध सितंबर 2026 तक या अगले आदेश जारी होने तक लागू रहेगा। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग और घरेलू उत्पादन को देखते हुए देश के भीतर पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना जरूरी है, ताकि आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव न बढ़े। हालांकि सरकार ने कुछ विशेष श्रेणियों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा है। यूरोपीय संघ और अमेरिका को CXL और TRQ कोटा के तहत होने वाला निर्यात जारी रहेगा। इसके अलावा एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत निर्यात तथा अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार-से-सरकार आधार पर होने वाली आपूर्ति भी जारी रह सकेगी। जिन खेपों की निर्यात प्रक्रिया पहले से चल रही है और जो फिजिकल एक्सपोर्ट पाइपलाइन में शामिल हैं, उन्हें भी इस फैसले से छूट दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को स्थिर रखने, त्योहारी सीजन में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन बदलते मौसम, गन्ना उत्पादन में उतार-चढ़ाव और एथेनॉल उत्पादन में बढ़ते उपयोग के कारण सरकार लगातार चीनी स्टॉक पर नजर बनाए हुए है। इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय चीनी बाजार पर भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि भारत वैश्विक चीनी निर्यात में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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