Narendra Modi द्वारा देश में ईंधन बचत और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने को लेकर शुरू की गई पहल का असर अब सरकार और आम जनता दोनों स्तरों पर दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री ने खुद उदाहरण पेश करते हुए अपने काफिले में लगभग 50 प्रतिशत तक कटौती की है। इसके साथ ही सुरक्षा बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने का फैसला भी लिया गया है, ताकि ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल सके। बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा संकट के बीच सरकार का यह कदम एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री की इस पहल के बाद कई बड़े नेताओं ने भी अपने काफिले छोटे करने शुरू कर दिए हैं। Amit Shah, Rajnath Singh और Mohan Yadav सहित कई नेताओं ने गाड़ियों की संख्या कम करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की दिशा में कदम उठाए हैं। सरकार का मानना है कि यदि वीआईपी स्तर पर सादगी और संसाधन बचत का संदेश जाएगा तो उसका सकारात्मक प्रभाव आम लोगों तक भी पहुंचेगा। इस अभियान का असर जनता की जीवनशैली में भी दिखाई देने लगा है। लोग अब महंगे सोने के आभूषणों की जगह आर्टिफिशियल ज्वेलरी को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं विदेश यात्रा की बजाय देश के भीतर पर्यटन स्थलों की ओर रुख बढ़ा है। उत्तराखंड के चमोली और झारखंड की पतरातू घाटी जैसे घरेलू पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि घरेलू पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसी बीच दिल्ली स्थित Bangla Sahib Gurudwara के गुरु हरिकृष्ण पॉलीक्लीनिक में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है। यहां अब केवल 1500 रुपये में एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी जैसी जांचों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही माइनर ऑपरेशन थिएटर भी शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य आम लोगों को कम खर्च में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देश में आम नागरिकों के लिए किफायती स्वास्थ्य सेवाओं और बचत आधारित जीवनशैली को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
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