Kerala के Thiruvanvandoor में आयोजित वार्षिक उत्सव के दौरान पारंपरिक ‘गजमेला’ ने श्रद्धा, संस्कृति और लोक परंपराओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जहां लोग रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर हिंदू देवी-देवताओं के स्वरूप में नजर आए। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और धार्मिक आस्था का विशेष माहौल दिखाई दिया। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों को आकर्षक सजावट से सजाया गया था, जबकि पारंपरिक संगीत और मंत्रोच्चार ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। गजमेला के दौरान सजे-धजे हाथियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो इस उत्सव का मुख्य आकर्षण रही। सुनहरे आभूषणों और पारंपरिक अलंकरणों से सुसज्जित हाथियों की कतार ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और भक्तों के जयकारों के बीच निकली यह शोभायात्रा केरल की प्राचीन धार्मिक परंपराओं की जीवंत झलक बन गई। आयोजन में स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों ने भी भाग लिया, जिससे यह उत्सव केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी बन गया। केरल में गजमेला जैसे आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं माने जाते, बल्कि ये राज्य की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे उत्सव सदियों पुरानी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं। तिरुवनवंडूर का यह आयोजन भी इसी परंपरा का उदाहरण बना, जहां श्रद्धा और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने इस भव्य आयोजन का आनंद लिया और केरल की समृद्ध लोक परंपराओं को करीब से महसूस किया।
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