स्वदेशी और स्वावलंबन से ही अर्जित होगा समृद्ध राष्ट्र और सांस्कृतिक संप्रभुता: राकेश मीणा

बांसवाड़ा में स्वदेशी जागरण मंच के बांसवाड़ा-डूंगरपुर जिले द्वारा आयोजित जिला स्तरीय ‘विचार वर्ग’ कार्यक्रम शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित चित्तौड़ प्रांत के पूर्णकालिक कार्यकर्ता राकेश मीणा ने कहा कि स्वदेशी और स्वावलंबन ही भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने तथा उसकी सांस्कृतिक संप्रभुता को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी मार्ग है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान, राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक जागरण का व्यापक आंदोलन है। अपने संबोधन में उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय और दंतोपंत ठेंगडी जी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का वास्तविक आर्थिक उत्थान तभी संभव है, जब देश अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा, स्थानीय संसाधनों, सामाजिक संरचना और स्वदेशी प्रतिभा पर आधारित आर्थिक मॉडल को अपनाए। उन्होंने कहा कि यह मॉडल केवल धन अर्जन पर आधारित नहीं, बल्कि समाज और व्यक्ति के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। राकेश मीणा ने बाजारवादी नीतियों के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि देश की आर्थिक व्यवस्था केवल बाहरी बाजार शक्तियों से संचालित होगी तो असमानता, बेरोजगारी और आयात पर निर्भरता लगातार बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगों के साथ-साथ लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, कृषि आधारित उत्पादन, ग्रामीण उद्यमिता तथा स्थानीय पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। इसी सोच के माध्यम से भारत पुनः “सोने की चिड़िया” के गौरवशाली स्थान को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि स्वावलंबन की भावना उन्हें नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमी बनाएगी। उन्होंने स्वदेशी के मूल मंत्र “इच्छा से स्वदेशी, ज़रूरत में स्वदेशी और मजबूरी में विदेशी” को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि इससे देश की पूंजी और संसाधन देश के भीतर ही सुरक्षित रहेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। विचार वर्ग के विभिन्न सत्रों में गहन वैचारिक मंथन भी हुआ। प्रथम सत्र में विभाग संयोजक नवनीत शुक्ल ने ‘स्वदेशी की विकास यात्रा’ विषय पर विस्तार से जानकारी दी। द्वितीय सत्र में जिला संयोजक प्रो. मनोज पंड्या ने ‘युगानुकूल स्वदेशी’ पर अपने व्यावहारिक विचार रखे। वहीं तृतीय सत्र में डूंगरपुर संयोजक जीतेंद्र जोशी ने दंतोपंत ठेंगडी, स्वामी विवेकानंद तथा बाबू गेनू जी के व्यक्तित्व और राष्ट्रवादी योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विचार परिवार से जुड़े विभिन्न संगठनों—विश्व हिंदू परिषद, भारतीय मजदूर संघ, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विद्या भारती तथा स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मोहन पटेल और हीरजी भाई ने की, जबकि शुभारंभ जीतेंद्र जोशी द्वारा प्रस्तुत काव्य गीत से हुआ। अंत में त्रिभुवन व्यास ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।

Rakesh Meena
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