देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी को जीवनशैली में ढालना जरूरी

राजसमन्द में Swadeshi Jagran Manch (चित्तौड़ प्रांत) के तत्वावधान में स्थानीय संघ कार्यालय में ‘जिला विचार वर्ग’ का सफल आयोजन किया गया। दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चले इस वैचारिक कार्यक्रम में मंच के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, उद्यमियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने देश को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के विषय पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम को तीन अलग-अलग सत्रों में आयोजित किया गया, जिनमें स्वदेशी, स्वावलंबन और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न पहलुओं पर विचार मंथन हुआ। प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता Dr. Devi Lal Sahu ने ‘युगानुकूल स्वदेशी’ विषय पर बोलते हुए कहा कि बदलते वैश्विक परिवेश में स्वदेशी की अवधारणा को आधुनिक और व्यवहारिक रूप में अपनाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने और लोगों में स्वदेशी के प्रति गर्व की भावना विकसित करने से ही देश आर्थिक रूप से सशक्त बन सकता है। द्वितीय सत्र में ‘स्वावलंबी भारत’ विषय पर मुख्य वक्ता Dheeraj Boda ने युवाओं को स्वरोजगार अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और युवाओं को केवल नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने वाला उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कुटीर उद्योगों और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। समापन सत्र में जिला संघचालक Meetha Lal Sharma ने ‘स्वदेशी उपादेयता’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि स्वदेशी केवल भारतीय वस्तुओं के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति और आर्थिक स्वतंत्रता का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब देश का धन देश के विकास में लगेगा, तभी भारत सही मायनों में आत्मनिर्भर बन पाएगा। कार्यक्रम में स्वदेशी जागरण मंच और स्वावलंबी भारत अभियान से जुड़े विभिन्न संगठनों के 20 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें युवा कार्यकर्ता और स्थानीय उद्यमी भी शामिल रहे। अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने संगठन के कार्यों को गांव-गांव और मंडल स्तर तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

Rakesh Meena
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