देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। पिछले दस दिनों में यह चौथी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं, जिससे आम लोगों की चिंता और बढ़ गई है। ताजा संशोधन के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इससे पहले 15 मई को दोनों ईंधनों के दाम में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि 19 मई को 90 पैसे प्रति लीटर और 23 मई को पेट्रोल में 87 पैसे तथा डीजल में 91 पैसे की वृद्धि दर्ज की गई थी। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी के बाद मई महीने में ही ईंधन की कीमतें लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं। इसका सीधा असर परिवहन लागत, खाद्य पदार्थों, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और माल ढुलाई पर पड़ने की संभावना है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ और बढ़ सकता है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर हमला बोलते हुए कहा कि “महंगाई मानव” फिर सक्रिय हो गया है और जनता पर लगातार आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। दूसरी ओर Nirmala Sitharaman ने वैश्विक संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए “3F फॉर्मूला” यानी Fuel, Fertiliser और Forex के संतुलित प्रबंधन पर जोर दिया है। उन्होंने विदेशी मुद्रा संरक्षण और गैर-जरूरी आयात, विशेषकर सोने की खरीद को सीमित करने की आवश्यकता भी बताई। वित्त मंत्री ने कहा कि मध्य-पूर्व और खासकर होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ रहा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बदलाव का प्रभाव घरेलू बाजार पर तेजी से दिखाई देता है। सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में कटौती किए जाने के कारण वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान भी जताया गया है। इसी बीच वित्त मंत्री ने MSME क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की और सभी सार्वजनिक उपक्रमों को निर्देश दिया कि वे छोटे उद्योगों के लंबित भुगतान 45 दिनों के भीतर करें। वर्तमान में करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये की राशि भुगतान में अटकी हुई है, जिससे छोटे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी और लिक्विडिटी प्रभावित हो रही है। वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और देश को घबराने के बजाय आर्थिक प्रबंधन को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है।
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