भीषण गर्मी और लगातार घटते जल स्तर के बीच Bhajan Lal Sharma ने राजस्थान में जल संरक्षण को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को राज्य के सबसे बड़े जल संरक्षण अभियान ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान 2026’ की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य मानसून आने से पहले राजस्थान की जल भंडारण क्षमता में 20 प्रतिशत तक वृद्धि करना है। अभियान की शुरुआत गंगा दशमी के अवसर पर भीलवाड़ा जिले में स्थित Bisaldev Mahadev Temple में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ की गई। इसके साथ ही भरतपुर के बांध बरेठा सहित राज्य के कई प्रमुख जलाशयों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। सरकार का मानना है कि यदि समय रहते जल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में राज्य को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। राजस्थान के पास देश के कुल सतही जल संसाधनों का केवल 1.2 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि राज्य में 693 जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 13 हजार मिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक है। लेकिन अप्रैल के अंत तक इनमें केवल 52.2 प्रतिशत पानी ही बचा था और पिछले छह महीनों में 227 जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं। भूजल की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। राज्य देश के केवल 1.7 प्रतिशत भूजल संसाधनों पर निर्भर है, लेकिन पीने के पानी की लगभग 90 प्रतिशत और सिंचाई की 60 प्रतिशत जरूरतें भूजल से पूरी होती हैं। कई जिलों में लगातार गिरते जलस्तर के कारण अनेक भूजल क्षेत्र ‘ओवर एक्सप्लॉइटेड’ और ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में पहुंच चुके हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए अभियान के तहत तालाबों और झीलों की सफाई, पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन और वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि “पानी ही भविष्य है, आज बचाई गई हर बूंद आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करेगी।” यह अभियान 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस तक चलेगा और इसे जन आंदोलन का रूप देने पर जोर दिया जा रहा है।
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