खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्त वर्ष 2024-25 में केवीआईसी का कुल कारोबार बढ़कर 1 लाख 87 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी छलांग मानी जा रही है। नई दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व, स्वदेशी सोच और देशभर के लाखों ग्रामीण कारीगरों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है। जहां पहले खादी उद्योग का कारोबार केवल 30 से 32 हजार करोड़ रुपये के आसपास था, वहीं अब यह कई गुना बढ़कर नए शिखर पर पहुंच गया है। मनोज कुमार ने बताया कि केवीआईसी आज देशभर में दो करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है। खास बात यह है कि इनमें लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं हैं, जिससे ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि खादी अब केवल पारंपरिक वस्त्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रतीक बन चुकी है। युवाओं में भी खादी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और आधुनिक डिजाइनों के कारण इसकी लोकप्रियता देश-विदेश में लगातार बढ़ रही है। सरकार ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देकर गांवों में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को मजबूत करने पर जोर दे रही है। केवीआईसी ने आने वाले समय में कारोबार को और विस्तार देने की भी तैयारी शुरू कर दी है। आयोग जल्द ही अपना ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लॉन्च करने जा रहा है, जिससे खादी और ग्रामोद्योग उत्पाद सीधे ऑनलाइन ग्राहकों तक पहुंच सकेंगे। इससे ग्रामीण कारीगरों और छोटे उद्यमियों को बड़ा बाजार मिलेगा और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए खादी उत्पादों की पहुंच राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक और अधिक मजबूत होगी। यह उपलब्धि भारत में स्वदेशी आंदोलन, ग्रामीण उद्योगों और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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