भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधार और इसके विस्तार की जोरदार मांग की है। संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक खुली बहस के दौरान भारत ने स्पष्ट कहा कि आज की बदलती वैश्विक परिस्थितियों, नई सुरक्षा चुनौतियों, आतंकवाद, साइबर खतरे और भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए UNSC की मौजूदा संरचना अब पर्याप्त और प्रभावी नहीं रह गई है। भारत का मानना है कि जिस दुनिया में आर्थिक, तकनीकी और राजनीतिक शक्ति का संतुलन तेजी से बदल रहा है, वहां वैश्विक निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था को भी उसी अनुसार आधुनिक और समावेशी बनाना जरूरी है ताकि वह वास्तविक वैश्विक प्रतिनिधित्व को दर्शा सके और सभी क्षेत्रों की समस्याओं का बेहतर समाधान कर सके। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरिश पवनतानेनी ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था कई विकासशील देशों और वैश्विक दक्षिण (Global South) की वास्तविक आवाज को पर्याप्त रूप से स्थान नहीं देती, जिसके कारण निर्णय प्रक्रिया में असंतुलन दिखाई देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वकारी, पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की जरूरत है ताकि यह केवल कुछ देशों तक सीमित न रहकर पूरे विश्व का संतुलित प्रतिनिधित्व कर सके। भारत लंबे समय से स्थायी सदस्यता और व्यापक सुधारों की मांग करता रहा है और उसका मानना है कि यदि यह सुधार लागू होते हैं तो वैश्विक शांति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई मजबूती मिलेगी और विकासशील देशों की भूमिका वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावशाली बन सकेगी।
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