केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि स्वदेशी सौर सेल तकनीक का विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है, जो देश को विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बना रहा है। उन्होंने भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ परिसर में स्वदेशी रूप से विकसित प्लाज्मा एन्हांस्ड केमिकल वेपर डिपोजिशन (PECVD) प्रणाली का उद्घाटन किया, जिसे आधुनिक सौर ऊर्जा तकनीक के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, यह प्रणाली भारत के पहले अमोर्फस सिलिकॉन सौर सेल के निर्माण में उपयोग की जाएगी, जिससे देश में उच्च गुणवत्ता वाले सौर उपकरणों का स्वदेशी उत्पादन संभव होगा। यह तकनीक न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की क्षमता को भी मजबूत करेगी। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि अब भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान को स्टार्टअप, उद्योग और समाज की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है, जिससे नवाचार को व्यावहारिक उपयोग में बदला जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का भविष्य ऐसी सस्ती, टिकाऊ और उपयोगी तकनीकों पर निर्भर करेगा, जो स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य और सतत विकास जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेंगी। इस पहल को देश में हरित ऊर्जा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
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