केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने कहा है कि पिछले वर्ष मेडिकल प्रवेश परीक्षा National Testing Agency द्वारा आयोजित NEET परीक्षा में जो गड़बड़ियां सामने आई थीं, वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थीं और सरकार अब किसी भी कीमत पर ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होने देना चाहती। आजतक को दिए विशेष इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि सरकार इस बार पूरी तरह “अलर्ट मोड” में काम कर रही है और परीक्षा को सुरक्षित, पारदर्शी तथा त्रुटिरहित बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर व्यापक तैयारी कर रही हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार बच्चों की मानसिक स्थिति और भविष्य को लेकर गंभीर है तथा परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि 21 जून को होने वाली परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्रों तक उसकी सुरक्षित पहुंच और परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रश्नपत्रों की सुरक्षित वापसी तक हर स्तर पर नई सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है। इस बार लगभग 22 लाख छात्र परीक्षा देंगे और देशभर के करीब 5,400 केंद्रों पर 1 लाख से अधिक कक्षाओं में परीक्षा आयोजित होगी। इसके लिए जिला स्तर तक समन्वय स्थापित किया गया है और राज्य सरकारों की सहायता से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अधिकतर परीक्षा केंद्र सरकारी संस्थानों में हों तथा सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का सख्ती से पालन हो। सरकार ने छात्रों का तनाव कम करने के लिए पिछले वर्ष रद्द हुई परीक्षा की फीस लौटाने और इस बार परीक्षा शुल्क माफ करने का निर्णय भी लिया है। इसके अलावा छात्रों को परीक्षा केंद्र बदलने का विकल्प भी दिया गया, जिसका लाभ लगभग 2.5 से 3 लाख विद्यार्थियों ने उठाया। धर्मेंद्र प्रधान ने स्वीकार किया कि पिछले वर्ष पेपर लीक और अंदरूनी मिलीभगत जैसी घटनाओं ने सरकार को भी चिंता में डाल दिया था। उन्होंने बताया कि इन घटनाओं के बाद बनी Radhakrishnan Committee की सिफारिशों को लागू करने का प्रयास किया गया है। मंत्री के अनुसार समिति ने कुल 102 सिफारिशें दी थीं, जिनमें से 70 से अधिक शॉर्ट-टर्म सिफारिशों को लागू किया जा चुका है। इसके बावजूद यदि कहीं चूक हुई, तो सरकार उसके लिए खेद व्यक्त करती है और छात्रों के प्रति जवाबदेह है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्तर तक इस पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है और “Whole of Government Approach” के तहत सभी सरकारी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में NEET को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (Computer Based Test) में बदला जा सकता है, क्योंकि पेन-एंड-पेपर प्रणाली में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अधिक रहती हैं। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया के विकेंद्रीकरण पर भी विचार हो सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि NTA आने वाले समय में और अधिक तकनीक-आधारित तथा मजबूत संस्था के रूप में विकसित होगी। मंत्री ने बताया कि NTA केवल NEET ही नहीं बल्कि JEE, CUET, UGC-NET और JRF जैसी बड़ी परीक्षाएं भी संचालित करती है, इसलिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए तकनीकी ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इंटरव्यू के दौरान Central Board of Secondary Education की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और उससे जुड़े विवादों पर भी शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि सीबीएसई ने पहली बार बड़े पैमाने पर डिजिटल ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन लागू किया है ताकि मूल्यांकन अधिक पारदर्शी और आधुनिक बन सके। हालांकि उन्होंने माना कि इस नई व्यवस्था के लिए शायद और अधिक पूर्व तैयारी की आवश्यकता थी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पहले भी रिवैल्यूएशन की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से होती थी, लेकिन इस बार पूरा मूल्यांकन ऑन-स्क्रीन हुआ है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखने और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया, जिसके कारण प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक लोड बढ़ गया और पेमेंट गेटवे जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आईं। सरकार ने इस स्थिति को संभालने के लिए Indian Institute of Technology Kanpur और Indian Institute of Technology Madras की विशेषज्ञ टीमों को प्लेटफॉर्म की सुरक्षा, क्षमता और तकनीकी मजबूती की जांच का दायित्व दिया है। इसके अलावा State Bank of India, Indian Bank, Canara Bank और Bank of Baroda के प्लेटफॉर्म को भी सिस्टम से जोड़ा गया है ताकि भुगतान और तकनीकी प्रक्रियाएं सुचारु रूप से चल सकें। मंत्री ने कहा कि यदि किसी कंपनी, अधिकारी या किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई गई, तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं Rahul Gandhi द्वारा OSM प्रणाली और संबंधित कंपनी पर लगाए गए आरोपों को उन्होंने राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया और कहा कि जिन कंपनियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वे विपक्ष शासित राज्यों में भी काम कर रही हैं।
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