Amit Shah ने भारत की सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नए ‘टेरिटोरियल सिक्योरिटी’ मॉडल की घोषणा की है। गुजरात के Bhuj में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अब पारंपरिक सीमा सुरक्षा व्यवस्था से आगे बढ़कर एक व्यापक, समन्वित और सहभागी सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा तंत्र को अधिक प्रभावी, त्वरित और सशक्त बनाना है, जिससे किसी भी चुनौती का बेहतर तरीके से सामना किया जा सके। गृह मंत्री ने बताया कि इस मॉडल के तहत एक चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड विकसित किया जाएगा, जिसमें आम नागरिक, नागरिक प्रशासन, स्थानीय पुलिस और सशस्त्र बल मिलकर कार्य करेंगे। यह व्यवस्था सीमावर्ती क्षेत्रों में सूचना साझा करने, त्वरित प्रतिक्रिया देने और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। इसी सोच के तहत स्थानीय नागरिकों को सुरक्षा तंत्र का महत्वपूर्ण भाग बनाया जाएगा, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में जागरूकता और सतर्कता दोनों बढ़ेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘टेरिटोरियल सिक्योरिटी’ मॉडल सीमा प्रबंधन को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इससे सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास एवं सहयोग मजबूत होगा, साथ ही संभावित खतरों की पहचान और रोकथाम में भी सहायता मिलेगी। यह पहल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, स्थिरता और नागरिक सहभागिता को भी बढ़ावा दे सकती है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसी समग्र सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जो आधुनिक चुनौतियों का सामना करते हुए देश की सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित कर सके।
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