केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 1 जून से शुरू होने वाला “खेत बचाओ अभियान” केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाला एक व्यापक राष्ट्रीय जन-अभियान होगा। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक किया जाए तथा मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए मिट्टी परीक्षण आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य खेती की लागत कम करना, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना और किसानों को समय पर सही तकनीकी सलाह उपलब्ध कराना है। इसके लिए पंचायतों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभागों तथा स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे गांवों और किसानों तक पहुंच सके। बैठक में कृषि मंत्री ने विशेष रूप से रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को कम करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन, हरी खाद, जैविक उत्पादों और जैव उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। मौसम संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किसानों को यह भी बताया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल उपयुक्त रहेगी, कब फसल विविधीकरण अपनाना चाहिए और कम पानी या जोखिम की स्थिति में कौन-से विकल्प बेहतर हो सकते हैं। अभियान का लक्ष्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि खेत स्तर पर किसानों को परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक और उपयोगी सलाह उपलब्ध कराना है। अभियान को सफल बनाने के लिए देशभर में व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) को प्रमुख समन्वयक की भूमिका दी गई है और 1600 से अधिक टीमों का गठन किया गया है। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों में 500 विशेष टीमें कार्य करेंगी, जिनमें कृषि वैज्ञानिक, ICAR संस्थानों के विशेषज्ञ तथा कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त 1150 से अधिक बहुविषयक टीमें भी समानांतर रूप से किसानों तक पहुंचेंगी। अभियान के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान योजना से वंचित लाभार्थियों को जोड़ना, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम और कॉटन मिशन, जल संरक्षण, मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन तथा क्षेत्र विशेष कृषि सलाह जैसी गतिविधियों को भी समन्वित रूप से जोड़ा जाएगा। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसका संदेश व्यवहारिक हो, जमीन पर दिखाई दे और स्थानीय समुदाय उससे जुड़े। उनका मानना है कि यदि संतुलित उर्वरक उपयोग, मौसम आधारित खेती, पंचायतों की सक्रियता और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके, तो यह अभियान किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत घटाने और कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास की नई संस्कृति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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