पिछले एक वर्ष के दौरान वैश्विक शेयर बाजारों में जहां कई देशों के प्रमुख सूचकांकों ने शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं भारतीय शेयर बाजार अपेक्षाकृत कमजोर बना हुआ है। निवेशकों को उम्मीद के अनुरूप रिटर्न नहीं मिल पाया है और निफ्टी भी दबाव में दिखाई दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह देश की दिग्गज कंपनियों का कमजोर प्रदर्शन है। भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने वाली प्रमुख कंपनियों में Reliance Industries, HDFC Bank, Tata Consultancy Services और Infosys शामिल हैं। इनमें से कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में अपेक्षित तेजी नहीं आई, जिसके कारण पूरे बाजार की गति प्रभावित हुई। विशेष रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो बाजार पूंजीकरण के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी कंपनी है, पिछले एक साल में निवेशकों को संतोषजनक रिटर्न देने में सफल नहीं रही। जब बाजार की अगुवाई करने वाली कंपनियां कमजोर प्रदर्शन करती हैं, तो उसका असर पूरे शेयर बाजार पर दिखाई देता है। दूसरी ओर दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में उनकी सबसे बड़ी कंपनियों ने रिकॉर्ड प्रदर्शन किया है। दक्षिण कोरिया में Samsung Electronics को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग का बड़ा लाभ मिला, जिससे उसके शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। जापान में SoftBank Group ने AI क्षेत्र में निवेश और तकनीकी कंपनियों की मजबूती के कारण शानदार प्रदर्शन किया। वहीं ताइवान की सबसे मूल्यवान कंपनी TSMC ने वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी मजबूत स्थिति के दम पर निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न दिया। दुनिया की अधिकांश उन्नत AI और प्रोसेसर चिप्स बनाने वाली यह कंपनी ताइवान के शेयर बाजार की दिशा निर्धारित करती है और इसके प्रदर्शन ने पूरे बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। अमेरिका में AI क्रांति का सबसे बड़ा लाभ NVIDIA को मिला है। कंपनी ने AI और डेटा सेंटर चिप्स की बढ़ती मांग के कारण बाजार पूंजीकरण के नए रिकॉर्ड बनाए हैं और निवेशकों को उल्लेखनीय रिटर्न दिया है। वहीं चीन में Tencent और Alibaba Group जैसी बड़ी कंपनियां नियामकीय चुनौतियों का सामना कर रही हैं, फिर भी वहां की कई अन्य कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन ने बाजार को सहारा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार में फिर से मजबूत तेजी आने के लिए बड़ी कंपनियों के मुनाफे, निवेश और विकास दर में सुधार जरूरी होगा। साथ ही विदेशी निवेशकों की वापसी, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में स्थिरता और घरेलू मांग में वृद्धि भी बाजार को नई दिशा दे सकती है। भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत मानी जाती हैं, लेकिन निकट भविष्य में बाजार की चाल काफी हद तक बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर रहेगी।
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