देश में जनगणना 2026 के तहत मकान सूचीकरण और मकान गणना का पहला चरण कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो गया है। इस अभियान के दौरान प्रशिक्षित प्रगणक घर-घर जाकर डिजिटल माध्यम से जानकारी एकत्र कर रहे हैं। जनगणना प्रक्रिया में पहली बार आधुनिक डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है, जिससे आंकड़ों का संग्रह पहले की तुलना में अधिक सटीक, तेज और पारदर्शी बनने की उम्मीद है। इस बार जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) सुविधा है। इसके माध्यम से नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने परिवार और आवास से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस सुविधा को लोगों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और अब तक लगभग 12 लाख परिवार अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर चुके हैं। इससे नागरिकों की भागीदारी बढ़ी है और जनगणना प्रक्रिया अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनी है। मकान सूचीकरण चरण में आवासों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और परिवारों से संबंधित आधारभूत जानकारी एकत्र की जा रही है। इसके बाद जनसंख्या गणना का मुख्य चरण आयोजित किया जाएगा, जिसमें जनसंख्या, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे। ये आंकड़े सरकार को विभिन्न योजनाओं और नीतियों के निर्माण में मदद करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल जनगणना से डेटा संग्रहण की गुणवत्ता में सुधार होगा, त्रुटियां कम होंगी और जानकारी का विश्लेषण तेजी से किया जा सकेगा। इससे भविष्य की विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने में सहायता मिलेगी। डिजिटल जनगणना 2026 को भारत की प्रशासनिक और सांख्यिकीय व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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