Narendra Modi ने महिला सशक्तिकरण को लेकर संसद के विशेष सत्र को ऐतिहासिक बताया है। इस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को नई मजबूती मिलेगी। लंबे समय से महिला आरक्षण की मांग की जा रही थी और इसे भारतीय लोकतंत्र में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 किए जाने का विचार भी शामिल बताया जा रहा है। साथ ही आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया को आधार बनाया जा सकता है। इससे विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों को उनकी जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, पोषण, सामाजिक न्याय और परिवार कल्याण जैसे मुद्दों को नीति निर्माण में अधिक महत्व मिलने की संभावना है। महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी लोकतंत्र को और अधिक समावेशी तथा प्रतिनिधिक बनाने में सहायक हो सकती है। 2029 के आम चुनाव से पहले इस पहल को भारतीय राजनीति में एक बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व देकर देश के विकास को नई गति दी जा सकती है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
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