भारत के शेयर बाजार को वैश्विक स्तर पर एक और बड़ा झटका लगा है। दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों की रैंकिंग में भारत अब सातवें स्थान पर पहुंच गया है। पहले ताइवान ने भारत को पीछे छोड़कर टॉप-5 की सूची से बाहर किया था और अब दक्षिण कोरिया भी भारत से आगे निकल गया है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर हो गया है, जबकि भारतीय बाजार का मूल्य घटकर करीब 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब भारत की अर्थव्यवस्था दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था से दोगुनी से भी अधिक बड़ी मानी जाती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान के अनुसार वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर और दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था करीब 1.93 ट्रिलियन डॉलर रहने की संभावना है। इसके बावजूद शेयर बाजार के आकार में भारत पीछे रह गया है, जो निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में तेजी से बढ़ता निवेश और तकनीकी कंपनियों का प्रभाव माना जा रहा है। दक्षिण कोरिया की प्रमुख कंपनियां Samsung Electronics और SK Hynix एआई सर्वर, डेटा सेंटर और मेमोरी चिप्स की वैश्विक मांग का बड़ा लाभ उठा रही हैं। इन कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल के कारण दक्षिण कोरियाई बाजार का मूल्य तेजी से बढ़ा है। इसी तरह Taiwan को भी एआई क्रांति का बड़ा फायदा मिला है, क्योंकि वहां की चिप निर्माण कंपनियां दुनिया की प्रमुख एआई परियोजनाओं को तकनीकी आधार प्रदान कर रही हैं। एआई आधारित निवेश की इस वैश्विक लहर ने ताइवान और दक्षिण कोरिया दोनों के शेयर बाजारों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार कई चुनौतियों से जूझ रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली, रुपये की कमजोरी, ऊंची ऊर्जा कीमतें, महंगाई और आय वृद्धि की धीमी रफ्तार ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अभी ऐसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों की कमी है जो वैश्विक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत सेमीकंडक्टर उद्योग से सीधे जुड़ी हों। यही कारण है कि दुनिया में एआई आधारित निवेश का जो लाभ ताइवान और दक्षिण कोरिया को मिल रहा है, उसका पूरा फायदा भारत नहीं उठा पा रहा है। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत विकास दर बनाए हुए है, लेकिन भविष्य में शेयर बाजार की वैश्विक स्थिति मजबूत करने के लिए एआई, चिप निर्माण, उच्च तकनीक विनिर्माण और नवाचार आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।
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