मजबूत मांग और नए ऑर्डर से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी, मई में PMI ने छुआ तीन महीने का उच्च स्तर

भारत के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र ने मई 2026 में शानदार प्रदर्शन किया है। एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) बढ़कर 55 पर पहुंच गया, जो अप्रैल के 54.7 से अधिक है और पिछले तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। PMI का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है, जबकि 50 से नीचे का स्तर गिरावट को दर्शाता है। खास बात यह है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र लगातार 55 महीनों से विस्तार के क्षेत्र में बना हुआ है, जो इसकी मजबूती को दर्शाता है। मई में नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, खरीदे गए कच्चे माल और सप्लायर डिलीवरी से जुड़े सभी प्रमुख संकेतकों में सुधार देखने को मिला। इससे साफ है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और उद्योगों को ग्राहकों से लगातार नए ऑर्डर मिल रहे हैं। सर्वे के अनुसार फरवरी के बाद पहली बार नए ऑर्डर और उत्पादन में इतनी तेज वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) और मध्यवर्ती वस्तुओं (Intermediate Goods) का उत्पादन उपभोक्ता वस्तुओं की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ा। इसका अर्थ है कि कंपनियां केवल मौजूदा मांग को पूरा नहीं कर रहीं, बल्कि भविष्य की मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी भी कर रही हैं। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने बताया कि बढ़ती मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में तेजी और नए व्यापारिक अवसरों ने उत्पादन गतिविधियों को मजबूती दी है। सरकार के पूंजीगत खर्च और निजी क्षेत्र के निवेश ने भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रोजगार के अवसरों में सुधार और कच्चे माल की खरीद में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि उद्योग आने वाले महीनों को लेकर आशावादी बने हुए हैं। हालांकि इस सकारात्मक तस्वीर के बीच कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं। एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कई कंपनियां एहतियातन अतिरिक्त स्टॉक जमा कर रही हैं। इससे खरीदारी गतिविधियों और तैयार माल के भंडार में तेजी आई है। यदि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ता है या कच्चे माल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो उत्पादन लागत पर असर पड़ सकता है। फिर भी वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र घरेलू मांग, निवेश और बुनियादी ढांचा विकास के सहारे मजबूती से आगे बढ़ रहा है। मई का PMI यह संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की औद्योगिक गतिविधियां अभी भी मजबूत गति बनाए हुए हैं और निकट भविष्य में विकास की संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।

Manisha Saini
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