भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) लागू होने के साथ ही भारतीय व्यापार के लिए नए अवसरों के द्वार खुल गए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता केवल दो देशों के बीच व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत को पूरे खाड़ी क्षेत्र, पूर्वी अफ्रीका और हिंद महासागर क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी। उनके अनुसार ओमान भारत के लिए सिर्फ एक निर्यात बाजार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक व्यापारिक साझेदार है। यह समझौता ऐसे समय में लागू हुआ है जब वैश्विक व्यापार भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में ओमान के साथ मजबूत आर्थिक संबंध भारत के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं। ओमान की भौगोलिक स्थिति इस समझौते को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। देश के प्रमुख बंदरगाहों — सोहर पोर्ट, डुक्म पोर्ट और सलालाह पोर्ट के माध्यम से भारतीय कंपनियां न केवल खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों तक आसानी से पहुंच बना सकेंगी, बल्कि पूर्वी अफ्रीका के उभरते बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बंदरगाहों के जरिए लॉजिस्टिक्स लागत कम हो सकती है और भारतीय निर्यातकों को तेज तथा अधिक विश्वसनीय आपूर्ति नेटवर्क उपलब्ध हो सकता है। इससे इंजीनियरिंग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल पुर्जों जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। यह समझौता रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधानों ने वैश्विक व्यापार मार्गों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत के लिए ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इस समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में ओमान के साथ मजबूत साझेदारी भारत को वैकल्पिक व्यापारिक और लॉजिस्टिक विकल्प उपलब्ध करा सकती है। अप्रैल 2026 में आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण GCC देशों को भारत का निर्यात 35 प्रतिशत तक घट गया था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि क्षेत्रीय अस्थिरता का व्यापार पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है। CEPA के माध्यम से भारत इस जोखिम को कुछ हद तक कम करने की कोशिश कर रहा है। दिसंबर में हस्ताक्षरित इस समझौते के तहत ओमान ने 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच देने की पेशकश की है, जिससे ओमान को होने वाले भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को लाभ मिलेगा। इसका मतलब है कि अधिकांश भारतीय उत्पाद बिना या बहुत कम शुल्क के ओमानी बाजार में प्रवेश कर सकेंगे। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। सरकार को उम्मीद है कि यह समझौता आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और रोजगार सृजन को नई गति देगा तथा भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और वैश्विक निर्यात बढ़ाने की रणनीति को भी मजबूती प्रदान करेगा।
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