भारतीय सेना अपने पुराने T-72 टैंकों को आधुनिक तकनीक से लैस कर मानव रहित (Remotely Operated) युद्धक प्लेटफॉर्म में बदलने की दिशा में काम कर रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत लगभग 2,400 टैंकों को मैनड-अनमैनड टीमिंग (Manned-Unmanned Teaming - MUM-T) अवधारणा के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य मौजूदा सैन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए सेना को आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप नई क्षमताएं प्रदान करना है। लंबे समय से सेवा में मौजूद T-72 टैंक भारतीय सेना की बख्तरबंद शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं और अब उन्हें नई भूमिका में उपयोग करने की तैयारी की जा रही है। परिवर्तित किए गए ये मानव रहित टैंक बारूदी सुरंग क्षेत्रों में सुरक्षित मार्ग बनाने (Minefield Breaching), टोही एवं निगरानी (Reconnaissance), दुश्मन को भ्रमित करने वाले छलावा अभियानों (Decoy Operations) तथा अन्य अत्यधिक जोखिम वाले सैन्य अभियानों में तैनात किए जा सकेंगे। चूंकि इन प्लेटफॉर्मों में चालक दल की आवश्यकता नहीं होगी, इसलिए दुश्मन की गोलीबारी या खतरनाक क्षेत्रों में भी इन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा सकेगा। इससे सैनिकों की सुरक्षा बढ़ेगी और युद्धक्षेत्र में जान-माल के नुकसान का जोखिम कम होगा। आधुनिक सेंसर, संचार प्रणाली और रिमोट कंट्रोल तकनीकों के माध्यम से ये टैंक मानव-संचालित इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित कर मिशन को अधिक प्रभावी बना सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारतीय सेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे T-72 टैंकों का परिचालन जीवन लगभग 15 से 20 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा, जिससे नए प्लेटफॉर्म खरीदने की तुलना में कम लागत पर उन्नत क्षमता प्राप्त होगी। साथ ही, मानव रहित युद्ध प्रणालियों की बढ़ती वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप भारत की रक्षा क्षमता भी मजबूत होगी। यह पहल न केवल संसाधनों के कुशल उपयोग का उदाहरण है, बल्कि भविष्य के नेटवर्क-केंद्रित और तकनीक-आधारित युद्ध के लिए भारतीय सेना को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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