अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव के बीच तेल टैंकरों की आवाजाही को लेकर नई रिपोर्टें सामने आई हैं। कई विश्लेषणों के अनुसार, बड़ी संख्या में तेल और गैस ले जाने वाले जहाज अब अपने AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) ट्रांसपोंडर बंद करके यात्रा कर रहे हैं, जिसे समुद्री क्षेत्र में "डार्क मोड" कहा जाता है। इससे जहाजों की रियल-टाइम लोकेशन को ट्रैक करना बेहद कठिन हो जाता है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारत, चीन और अन्य एशियाई देशों के लिए कुछ ऊर्जा आपूर्ति इसी तरीके से जारी रखी जा रही है। समुद्री खुफिया कंपनियों के अनुसार हाल के महीनों में ट्रांसपोंडर बंद रखने वाले जहाजों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे वास्तविक तेल आपूर्ति का आकलन करना मुश्किल हो गया है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि होर्मुज पूरी तरह बंद होने के दावों के बावजूद कुछ वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही जारी रहने की खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि व्यावसायिक जहाज अब भी जलडमरूमध्य से आजा रहे हैं, जबकि ईरान समय-समय पर नियंत्रण और प्रतिबंधों की घोषणा करता रहा है। इस वजह से स्थिति काफी जटिल बनी हुई है और वास्तविक ट्रैफिक सामान्य स्तर से बहुत कम माना जा रहा है। भारत के लिए इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। यदि होर्मुज मार्ग पर लंबे समय तक संकट बना रहता है, तो तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है। इसी कारण तेल कंपनियां और शिपिंग ऑपरेटर वैकल्पिक मार्गों, सुरक्षा व्यवस्थाओं और गोपनीय समुद्री संचालन के तरीकों का उपयोग कर रहे हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह बाधित न हो। इस संकट के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है।
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