पेट्रोलियम पर पाबंदी, महंगाई दर भी बढ़ी देश में आम लोगों और उद्योगों से जुड़ी दो बड़ी आर्थिक खबरें सामने आई हैं। पहली, केंद्र सरकार ने बड़े औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं द्वारा पेट्रोल और डीजल की खुदरा पेट्रोल पंपों से खरीद पर अस्थायी रूप से 90 दिनों तक रोक लगा दी है। सरकार का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में खुदरा और थोक ईंधन कीमतों के बीच बड़े अंतर के कारण उद्योग और बड़े उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे थे, जिससे सामान्य उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा था। अब ऐसे उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत का ईंधन निर्धारित थोक बिक्री केंद्रों या अपने अधिकृत स्रोतों से खरीदना होगा। साथ ही खुदरा पंपों पर डीजल की खरीद को भी सीमित किया गया है ताकि जमाखोरी और अनावश्यक मांग को रोका जा सके। सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े असर को देखते हुए यह कदम ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जरूरी है। दूसरी ओर, महंगाई के मोर्चे पर भी लोगों को राहत नहीं मिली है। मई 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई, जो अप्रैल के मुकाबले अधिक है। खाद्य पदार्थों, सब्जियों, ईंधन और परिवहन लागत में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हाल के हफ्तों में हुई वृद्धि का असर माल ढुलाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में महंगाई पर और दबाव बन सकता है। हालांकि महंगाई अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक के लक्ष्य दायरे के भीतर है, फिर भी बढ़ती खाद्य और ईंधन कीमतें आम लोगों के घरेलू बजट पर असर डाल रही हैं। कुल मिलाकर, एक तरफ सरकार ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बड़े खरीदारों पर नियंत्रण लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। यदि पेट्रोलियम उत्पाद और खाद्य वस्तुएं आगे भी महंगी होती हैं, तो परिवहन, कृषि और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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